रविवार व्रत हर सप्ताह रविवार के दिन रखा जाता है। यह व्रत भगवान सूर्य और सूर्य ग्रह से संबंधित माना जाता है। इस लेख में रविवार व्रत पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
रविवार व्रत का महत्व
परंपरा के अनुसार रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि रविवार का व्रत रखने और सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्य, तेज और यश की प्राप्ति होती है तथा सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। सूर्य देव को स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का कारक माना जाता है।
रविवार व्रत पूजा कब करें?
- व्रत दिवस: प्रत्येक सप्ताह का रविवार।
- पूजा काल: प्रातःकाल सूर्योदय के समय (रविवार के दिन लाल वस्त्र धारण करें)।
रविवार व्रत पूजा की सामग्री
- रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
- लाल रंग के पुष्प, दीपक, कपूर, घी,
- फल, मिठाई, गुड़, गेहूं (दान के लिए),
- भगवान सूर्य की मूर्ति/तस्वीर।
रविवार व्रत पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत एवं पूजा का संकल्प करें।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — भगवान सूर्य का पूजन
भगवान सूर्य का पूजन करते हुए उपचार-अर्पण करें:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 4 — सूर्य अर्घ्य एवं दान
पूजा के बाद सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें और गुड़, गेहूं आदि का दान करें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
रविवार व्रत के नियम
- रविवार के दिन व्रत रखकर संयम का पालन करें।
- इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना अनिवार्य माना जाता है।
- रविवार को लाल वस्त्र धारण करें।
- पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।