नरसिंह कवच — सुरक्षा का स्तोत्र

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिरण्यकशिपु ने कठोर तपस्या से अमरता का वरदान मांगा, परंतु अपने पुत्र प्रह्लाद से शत्रुता रखी, क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। अनेक यत्नों के बाद भी जब हिरण्यकशिपु प्रह्लाद को हानि न पहुंचा सका, तब स्तंभ से प्रकट हुए भगवान नरसिंह ने उस दुर्दांत अत्याचारी का संहार किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इसी घटना से भगवान नरसिंह भक्ति की रक्षा और भय के नाश के प्रतीक माने जाते हैं।

कवच का अर्थ

कवच शब्द का अर्थ है ढाल, रक्षा या सुरक्षा-कवच। नरसिंह कवच एक स्तोत्र है जिसमें भगवान नरसिंह से शरीर, मन और आत्मा की रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह कवच भक्त को हर दिशा से, हर परिस्थिति में सुरक्षित रखने की भावना रखता है। परंपरा में यह बताया गया है कि जो व्यक्ति इस कवच का श्रद्धा से पाठ करता है, वह भय, शत्रु और प्राकृतिक विपत्तियों से सुरक्षित रहता है। नरसिंह भगवान का स्वरूप उग्र है, किंतु उनकी उग्रता केवल अधर्म के नाश के लिए है, भक्तों के लिए वे सदा कल्याणकारी हैं।

नरसिंह ध्यान श्लोक

पाठ के पहले भगवान नरसिंह का ध्यान करने के लिए यह श्लोक बहुत प्रचलित है —

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

इसका सरल अर्थ है — जो उग्र हैं, वीर हैं, महाविष्णु स्वरूप हैं, जो दीप्तिमान हैं और सब ओर मुख रखते हैं, उन भयानक किंतु कल्याणकारी नरसिंह को, जो मृत्यु के भी शत्रु हैं, मैं प्रणाम करता हूं। अर्थात यह श्लोक नरसिंह भगवान के दिव्य, प्रचंड किंतु भक्तों के लिए कल्याणकारी स्वरूप का ध्यान कराता है।

कवच पाठ की विधि

मंगलवार का दिन नरसिंह भगवान की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। नरसिंह चतुर्दशी (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) के दिन इस कवच के पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। पाठ करने से पहले प्रातः स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। आसन पर बैठकर ध्यान श्लोक का पाठ करें, फिर पूरे कवच का पाठ करें। कवच के पाठ के समय मन में भय, चिंता और संकट के नाश की भावना रखें। पाठ के बाद भगवान नरसिंह का धन्यवाद करें।

नियम

इस कवच का पाठ करने के लिए किसी जटिल नियम की आवश्यकता नहीं है। मुख्य नियम है — श्रद्धा और नियमितता। मंगलवार को प्रयास अवश्य करें, और संभव हो तो प्रतिदिन। पाठ करते समय मन को एकाग्र रखें और भगवान नरसिंह के दर्शनों की भावना करें। महिलाएं भी इस कवच का पाठ कर सकती हैं। जिन्हें भय, शत्रु भय या मानसिक तनाव सताता हो, वे विशेष रूप से इस कवच की शरण लेते हैं।

विष्णु भक्ति को समृद्ध करने के लिए विष्णु चालीसा का पाठ करें और विष्णु सहस्रनाम का अध्ययन करें। भगवान नरसिंह को विष्णु का ही अवतार माना जाता है, इसलिए राम चालीसा का पाठ भी इच्छित है।

नरसिंह कवच का पूर्ण पाठ

विनयोग: सीधे हाथ में जल लेकर पढ़े।
ॐ अस्य श्रीलक्ष्मीनृसिंह कवच महामंत्रस्य ब्रह्माऋिषः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीनृसिंहोदेवता, ॐ क्षौ बीजम्, ॐ रौं शक्तिः, ॐ ऐं क्लीं कीलकम्, मम सर्वरोग, शत्रु, चौर, पन्नग, व्याघ्र, वृश्चिक, भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी-शाकिनी, यन्त्र मंत्रादि, सर्व विघ्न निवाराणार्थे श्री नृसिहं कवच महामंत्र जपे विनयोगः। जल भूमि पर छोड़ दें।
अथ ऋष्यादिन्यास:
ॐ ब्रह्माऋषये नमः शिरसि ।
ॐ अनुष्टुप् छन्दसे नमो मुखे ।
ॐ श्रीलक्ष्मी नृसिंह देवताये नमो हृदये ।
ॐ क्षौं बीजाय नमोनाभ्याम् ।
ॐ शक्तये नमः कटिदेशे ।
ॐ ऐं क्लीं कीलकाय नमः पादयोः ।
ॐ श्रीनृसिंह कवचमहामंत्र जपे विनयोगाय नमः सर्वाङ्गे ॥
अथ करन्यास:
ॐ क्षौं अगुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ प्रौं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ ह्रौं मध्यमाभयां नमः ।
ॐ रौं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ ब्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ जौं करतलकर पृष्ठाभ्यां नमः ।
अथ हृदयादिन्यास:
ॐ क्षौ हृदयाय नमः ।
ॐ प्रौं शिरसे स्वाहा ।
ॐ ह्रौं शिखायै वषट् ।
ॐ रौं कवचाय हुम् ।
ॐ ब्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ जौं अस्त्राय फट् ।
नृसिंह ध्यान:
ॐ सत्यं ज्ञान सुखस्वरूप ममलं क्षीराब्धि मध्ये स्थित् ।
योगारूढमति प्रसन्नवदनं भूषा सहस्रोज्वलम् ॥
तीक्ष्णं चक्र पीनाक शायकवरान् विभ्राणमर्कच्छवि ।
छत्रि भूतफणिन्द्रमिन्दुधवलं लक्ष्मी नृसिंह भजे ॥
॥ कवच पाठ ॥
ॐ नमोनृसिंहाय सर्व दुष्ट विनाशनाय सर्वंजन मोहनाय सर्वराज्यवश्यं कुरु कुरु स्वाहा ।
ॐ नमो नृसिंहाय नृसिंहराजाय नरकेशाय नमो नमस्ते ।
ॐ नमः कालाय काल द्रष्ट्राय कराल वदनाय च ।
ॐ उग्राय उग्र वीराय उग्र विकटाय उग्र वज्राय वज्र देहिने रुद्राय रुद्र घोराय भद्राय भद्रकारिणे ॐ ज्रीं ह्रीं नृसिंहाय नमः स्वाहा !!
ॐ नमो नृसिंहाय कपिलाय कपिल जटाय अमोघवाचाय सत्यं सत्यं व्रतं महोग्र प्रचण्ड रुपाय ।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं ॐ ह्रुं ह्रुं ह्रुं ॐ क्ष्रां क्ष्रीं क्ष्रौं फट् स्वाहा ।
ॐ नमो नृसिंहाय कपिल जटाय ममः सर्व रोगान् बन्ध बन्ध, सर्व ग्रहान बन्ध बन्ध, सर्व दोषादीनां बन्ध बन्ध, सर्व वृश्चिकादिनां विषं बन्ध बन्ध, सर्व भूत प्रेत, पिशाच, डाकिनी शाकिनी, यंत्र मंत्रादीन् बन्ध बन्ध, कीलय कीलय चूर्णय चूर्णय, मर्दय मर्दय, ऐं ऐं एहि एहि, मम येये विरोधिन्स्तान् सर्वान् सर्वतो हन हन, दह दह, मथ मथ, पच पच, चक्रेण, गदा, वज्रेण भष्मी कुरु कुरु स्वाहा ।
ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं ह्रीं क्ष्रीं क्ष्रीं क्ष्रौं नृसिंहाय नमः स्वाहा ।
ॐ आं ह्रीं क्ष्रौं क्रौं ह्रुं फट् ।
ॐ नमो भगवते सुदर्शन नृसिंहाय मम विजय रुपे कार्ये ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल असाध्यमेनकार्य शीघ्रं साधय साधय एनं सर्व प्रतिबन्धकेभ्यः सर्वतो रक्ष रक्ष हुं फट् स्वाहा ।
ॐ क्षौं नमो भगवते नृसिंहाय एतद्दोषं प्रचण्ड चक्रेण जहि जहि स्वाहा ।
ॐ नमो भगवते महानृसिंहाय कराल वदन दंष्ट्राय मम विघ्नान् पच पच स्वाहा ।
ॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप वक्षस्थल विदारणाय त्रिभुवन व्यापकाय भूत-प्रेत पिशाच डाकिनी-शाकिनी कालनोन्मूलनाय मम शरीरं स्तम्भोद्भव समस्त दोषान् हन हन, शर शर, चल चल, कम्पय कम्पय, मथ मथ, हुं फट् ठः ठः ।
ॐ नमो भगवते भो भो सुदर्शन नृसिंह ॐ आं ह्रीं क्रौं क्ष्रौं हुं फट् ।
ॐ सहस्त्रार मम अंग वर्तमान ममुक रोगं दारय दारय दुरितं हन हन पापं मथ मथ आरोग्यं कुरु कुरु ह्रां ह्रीं ह्रुं ह्रैं ह्रौं ह्रुं ह्रुं फट् मम शत्रु हन हन द्विष द्विष तद पचयं कुरु कुरु मम सर्वार्थं साधय साधय ।
ॐ नमो भगवते नृसिंहाय ॐ क्ष्रौं क्रौं आं ह्रीं क्लीं श्रीं रां स्फ्रें ब्लुं यं रं लं वं षं स्त्रां हुं फट् स्वाहा ।
ॐ नमः भगवते नृसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे अविराभिर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रंधय रंधय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा ।
अभयमभयात्मनि भूयिष्ठाः ॐ क्षौम् ।
ॐ नमो भगवते तुभ्य पुरुषाय महात्मने हरिंऽद्भुत सिंहाय ब्रह्मणे परमात्मने ।
ॐ उग्रं उग्रं महाविष्णुं सकलाधारं सर्वतोमुखम् ।
नृसिंह भीषणं भद्रं मृत्युं मृत्युं नमाम्यहम् ।
॥ इति श्री नृसिंह कवच संपूर्ण ॥

ऊपर बताए गए लाभ धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।