हिंगलाज गंगा अर्थात् नैना देवी शक्ति पीठ हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यहाँ सती की बाईं आँख गिरी थी, जिसके कारण यहाँ की देवी नैना देवी — नयन अर्थात् आँख — के नाम से विख्यात हैं। पिठानिर्णय ग्रंथ में इसे प्रमुख शक्ति पीठों में गिना गया है।
परिचय
नैना देवी शक्ति पीठ, जिसे हिंगलाज गंगा के नाम से भी जाना जाता है, हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ भारत के पचासी शक्ति पीठों की सूची में तेईसवाँ स्थान रखता है और पिठानिर्णय, शिवपुराण तथा देवी भागवत पुराण जैसे ग्रंथों में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। यहाँ की देवी नैना देवी माँ दुर्गा का एक शक्तिशाली स्वरूप मानी जाती हैं। नैना शब्द संस्कृत भाषा में नेत्र अर्थात् आँख को सूचित करता है, जो सती के बाएँ नेत्र के यहाँ गिरने की पौराणिक कथा से सीधे संबंधित है।
पौराणिक कथा
शिवपुराण और देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति ने अपनी पुत्री सती और भगवान शिव का अपमान किया, तब सती ने अपने पिता के यज्ञ में कूदकर अपने शरीर को भस्म कर लिया। भगवान शिव ने सती के दहनशील शरीर को अपने कंधे पर रखकर तांडव करना प्रारंभ किया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के खण्ड कर दिए, जिससे शिव का तांडव रुक सके। सती के शरीर के खण्ड जहाँ-जहाँ पृथ्वी पर गिरे, वहाँ-वहाँ शक्ति पीठों की स्थापना हुई। इन्हीं में से एक हिंगलाज गंगा है, जहाँ सती की बाईं आँख गिरी थी।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सती का बायाँ नेत्र इस स्थान पर गिरा, तब यहाँ एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और पूरे क्षेत्र में एक अलौकिक प्रकाश फैल गया। स्थानीय परंपरा के अनुसार, यहाँ की पवित्र झील — नयन सरोवर — सती के नेत्र से निकले जल से उत्पन्न हुई। इसी कारण यहाँ की देवी का नाम नैना देवी पड़ा। शिवपुराण में वर्णित है कि इस स्थान पर माँ नैना देवी का वास है और यहाँ की भूमि अत्यंत पवित्र है। कहा जाता है कि इस स्थान पर भक्तजन अपनी आँखों के रोगों से मुक्ति पाने के लिए विशेष रूप से आते हैं।
भौगोलिक स्थिति
नैना देवी शक्ति पीठ हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है। यह मंदिर लगभग बारह सौ मीटर की ऊँचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। बिलासपुर शहर से यह स्थान लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर है। शहर से मंदिर तक सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है और अंतिम चरण में या तो पैदल सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं या रोपवे का उपयोग किया जा सकता है। मंदिर के पास एक प्राचीन झील — नयन सरोवर — स्थित है, जिसे सती के नेत्र से निकले पवित्र जल का प्रतीक माना जाता है। भाखड़ा बाँध और गोविंद सागर झील भी इस क्षेत्र में निकट ही स्थित हैं।
ऐतिहासिक महत्व
नैना देवी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पिठानिर्णय ग्रंथ में इस पीठ का उल्लेख प्रमुख शक्ति पीठों में किया गया है। माना जाता है कि मूल मंदिर का निर्माण अत्यंत प्राचीन काल में हुआ था। वर्तमान मंदिर का स्वरूप अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में हुए पुनर्निर्माण का परिणाम है। बिलासपुर रियासत के राजाओं ने इस मंदिर के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, मुगल काल में भी यह मंदिर अपनी धार्मिक प्रतिष्ठा बनाए रखने में सफल रहा। आधुनिक काल में, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी इस मंदिर ने स्थानीय जनता को एकता और साहस प्रदान करने में योगदान दिया।
धार्मिक परंपरा एवं पूजा विधि
नैना देवी मंदिर में प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल दोनों समय पूजा-अर्चना होती है। प्रातःकाल की पूजा ब्रह्म मुहूर्त में प्रारंभ होती है। विशेष पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ, ललिता सहस्रनाम और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया जाता है। मंदिर में देवी की मूर्ति चाँदी के आसन पर विराजमान है। कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ नैना देवी के दर्शन करता है, उसकी आँखों के सभी रोग दूर हो जाते हैं। यहाँ की विशेष पूजा विधि में नेत्र रोगों से मुक्ति के लिए विशेष अनुष्ठान भी शामिल हैं।
वार्षिक उत्सव एवं मेले
नैना देवी मंदिर में सबसे प्रमुख उत्सव नवरात्र है, जो चैत्र और आश्विन मास में मनाया जाता है। नवरात्र के दौरान यहाँ विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है। श्रावण मास में यहाँ विशेष मेला लगता है, जिसमें हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भक्तगण दर्शन के लिए आते हैं। बैसाखी, मकर संक्रांति और होली के अवसर पर भी मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। दीपावली के समय मंदिर को दीपों और फूलों से सजाया जाता है।
यात्रा मार्गदर्शन
नैना देवी मंदिर तक पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन बिलासपुर है, जो मंदिर से लगभग तीस किलोमीटर दूर है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन दिल्ली-शिमला रेल मार्ग पर स्थित है। सड़क मार्ग से बिलासपुर चंडीगढ़ से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर और शिमला से लगभग दो सौ किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर तक जाने के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है। निकटतम हवाई अड्डा चंडीगढ़ हवाई अड्डा है। यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर है।
निष्कर्ष
नैना देवी शक्ति पीठ हिमाचल प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। यहाँ की पौराणिक मान्यता, भौगोलिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व इसे एक अद्वितीय तीर्थस्थल बनाते हैं। भक्तजनों के लिए यह स्थान माँ दुर्गा के नेत्र स्वरूप के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक पवित्र अवसर है।
विभिन्न परंपराओं में मतभेद
बाईं आँख
— Pithanirnayaनैना देवी
— Pithanirnayaक्रोधीश
— Pithanirnayaबिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
— Pithanirnayaएक प्रमुख शक्ति पीठ
— Pithanirnayaहिंगलाज
— Pithanirnayaनयन सरोवर
— Local traditionमतभेद और टिप्पणी
कुछ परंपराओं में हिंगलाज गंगा को अलग स्थान माना जाता है और नैना देवी मंदिर को भिन्न शक्ति पीठ के रूप में पहचाना जाता है। पिठानिर्णय में इसे बाईं आँख का पीठ बताया गया है, जबकि कुछ स्थानीय परंपराओं में इसे सती के पूरे नेत्र से संबंधित माना जाता है।
यह सामग्री पिठानिर्णय ग्रंथ, शिवपुराण, देवी भागवत पुराण और स्थानीय अभिलेखों के आधार पर संकलित की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नैना देवी शक्ति पीठ हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में लगभग बारह सौ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। बिलासपुर शहर से यह स्थान लगभग तीस किलोमीटर दूर है।
पिठानिर्णय ग्रंथ के अनुसार, इस स्थान पर सती की बाईं आँख गिरी थी, जिसके कारण यहाँ की देवी नैना देवी के नाम से विख्यात हैं।
यहाँ की मुख्य देवी नैना देवी हैं, जो माँ दुर्गा का एक शक्तिशाली स्वरूप हैं। नैना शब्द का अर्थ नेत्र है।
यहाँ नेत्र रोगों से मुक्ति के लिए विशेष पूजा विधि है। दुर्गा सप्तशती पाठ, ललिता सहस्रनाम और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर है। नवरात्र और श्रावण मास के दौरान विशेष मेले लगते हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन बिलासपुर है। बिलासपुर से मंदिर तक बस, टैक्सी अथवा रोपवे द्वारा पहुँचा जा सकता है।
यहाँ के भैरव क्रोधीश के नाम से विख्यात हैं, जो पिठानिर्णय ग्रंथ में इस पीठ के भैरव के रूप में वर्णित हैं।
संबंधित शक्तिपीठ
स्रोत और संदर्भ
- शक्ति पीठ: धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन — डॉ. मधुसूदन शर्मा , भारतीय संस्कृति संस्थान
- बिलासपुर रियासत का इतिहास — राजा किशोर सिंह , राज अभिलेखागार
- पिठानिर्णय ग्रंथ — अत्रि ऋषि , शैव परंपरा
- शिवपुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य
- भारत के तीर्थ स्थान — रामनाथ शर्मा , राष्ट्रीय साहित्य प्रकाशन
- हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग — हिमाचल प्रदेश सरकार , आधिकारिक पर्यटन पोर्टल [link]
- देवी भागवत पुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य
- मार्कण्डेय पुराण — ऋषि मार्कण्डेय , वैदिक साहित्य