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झारखंड शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Jharkhand Shakti Peeth — दक्षिण गुल्फ से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

झारखंड शक्ति पीठ पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित एक प्राचीन शक्ति पीठ है। यह पीठ दायें टखने के गिरने से संबंधित है और यहाँ माँ बर्गभीमा देवी की पूजा की जाती है। बर्गभीमा देवी को भीमा का बल प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। यहाँ भैरव के रूप में कपिलाम्बर भैरव की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सती का दाह संस्कार हो रहा था, तब उनका दायाँ टखना इस स्थान पर गिरा था।

परिचय

झारखंड शक्ति पीठ भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यहाँ माँ बर्गभीमा देवी की पूजा की जाती है, जो दुर्गा का एक विशेष रूप हैं। बर्गभीमा देवी को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। भैरव कपिलाम्बर यहाँ देवी के साथ विराजमान हैं।

झारखंड शब्द का शाब्दिक अर्थ है वन प्रदेश या जंगलों का क्षेत्र। यह स्थान घने जंगलों से घिरा हुआ है और यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है।

पौराणिक कथा

शक्ति पीठों की कथा सती और शिव से जुड़ी है। जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया, तब भगवान विष्णु ने सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। सती के शरीर के 51 टुकड़े भारत के विभिन्न स्थानों पर गिरे।

झारखंड शक्ति पीठ वह स्थान है जहाँ सती का दायाँ टखना गिरा था। बर्गभीमा देवी ने यहाँ राक्षसों का वध किया और भक्तों की रक्षा की।

भौगोलिक स्थिति

झारखंड शक्ति पीठ पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित है। यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है। निकटतम रेलवे स्टेशन मेदिनीपुर है, जो लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है।

सड़क मार्ग से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।

ऐतिहासिक महत्व

झारखंड शक्ति पीठ का ऐतिहासिक महत्व गहरा है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, यह मंदिर प्राचीन काल से चला आ रहा है।

ब्रिटिश काल में भी इस मंदिर का उल्लेख अभिलेखों में मिलता है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस मंदिर ने भूमिका निभाई।

धार्मिक परंपरा

झारखंड शक्ति पीठ में बर्गभीमा देवी की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। देवी की मूर्ति काले पत्थर से निर्मित है।

इस पीठ में नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

वार्षिक उत्सव

सबसे प्रमुख उत्सव नवरात्रि और दुर्गा पूजा है। मकर संक्रांति, वसंत पंचमी और रक्षाबंधन भी यहाँ मनाई जाती है।

यात्रा मार्गदर्शन

निकटतम रेलवे स्टेशन मेदिनीपुर है जो 30 किलोमीटर दूर है। मंदिर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

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दायाँ टखना यहाँ गिरा था

— शैव परंपरा
Devi_name

बर्गभीमा देवी - भीमा का बल प्रदान करने वाली

— शाक्त परंपरा
Bhairava_name

कपिलाम्बर भैरव - इस पीठ के रक्षक

— शैव परंपरा
Location

पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल - पठारी क्षेत्र में

— ऐतिहासिक परंपरा
Tradition

बर्गभीमा परंपरा - शक्ति और साहस की पूजा

— तांत्रिक परंपरा

मतभेद और टिप्पणी

झारखंड शक्ति पीठ के स्वामित्व को लेकर कुछ विवाद रहे हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह पीठ मूल रूप से एक आदिवासी स्थल था।

संपादकीय टिप्पणी:

झारखंड शक्ति पीठ प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड शक्ति पीठ में माँ बर्गभीमा देवी की पूजा की जाती है।

यह पीठ सती के दायें टखने के गिरने से संबंधित है।

निकटतम रेलवे स्टेशन मेदिनीपुर है जो 30 किलोमीटर दूर है।

मंदिर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।

दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर को सुंदर ढंग से सजाया जाता है।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • बंगाल के शक्ति पीठ — डॉ. राजेश्वर चट्टोपाध्याय , कलकत्ता विश्वविद्यालय
  • झारखंड का इतिहास — डॉ. भारती नाथ मुखोपाध्याय , ओरिएंटल बुक सेंटर
  • बंगाल का इतिहास — राजशेखर बसु , विश्वविद्यालय प्रकाशन
  • मार्कंडेय पुराण — वेदव्यास , भारतीय धर्म ग्रंथ
  • देवी माहात्म्य — वेदव्यास , भारतीय धर्म ग्रंथ
  • भारतीय मंदिर वास्तुकला — माइकल मीस्टर , ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस
  • झारखंड शक्ति पीठ आधिकारिक वेबसाइट — झारखंड मंदिर समिति , झारखंड शक्ति पीठ [link]
  • दुर्गा सप्तशती — मार्कंडेय ऋषि , भारतीय धर्म ग्रंथ