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अजमेर शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Ajmer Shakti Peeth — वाम बाहु से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

Ajmer Sharif Dargah
Ajmer Sharif Dargah, Ajmer, Rajasthan — Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

अजमेर शक्ति पीठ राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित एक प्राचीन शक्ति पीठ है। यहाँ देवी सती का बायाँ हाथ गिरा था। अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित यह मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है।

परिचय

अजमेर शक्ति पीठ राजस्थान राज्य के अजमेर जिले में स्थित एक प्राचीन शक्ति पीठ है। यह पीठ 51 शक्ति पीठों में से एक है, जहाँ देवी सती का बायाँ हाथ गिरा था। अर्बुदा देवी यहाँ प्रमुख देवी के रूप में पूजित हैं।

अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित यह मंदिर अजमेर शहर के एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। पुष्कर तीर्थ भी इसके निकट स्थित है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवी सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने आप को अग्नि में समर्पित कर दिया, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित होकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया।

अजमेर में सती का बायाँ हाथ गिरा था। इस स्थान पर अर्बुदा देवी का प्राकट्य हुआ। अरावली पर्वत श्रृंखला को प्राचीन काल से एक पवित्र पर्वत माना जाता रहा है। मार्कण्डेय पुराण में इस क्षेत्र की महिमा का वर्णन है।

भौगोलिक स्थिति

अजमेर शक्ति पीठ राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित है। अजमेर अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 135 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यहाँ की जलवायु अर्ध-शुष्क है। पुष्कर झील और अनासागर झील यहाँ की प्रमुख जल संरचनाएँ हैं।

ऐतिहासिक महत्व

अजमेर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। अजमेर की स्थापना चौहान वंश के राजा अजयपाल ने 7वीं शताब्दी में की थी। मध्यकाल में यह राजपूत और मुगल शासन का केंद्र रहा। मुगल सम्राट अकबर ने अजमेर को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र बनाया।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर का सबसे प्रसिद्ध स्थान है। पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में भी अजमेर एक प्रमुख नगर था।

धार्मिक परंपरा

अजमेर शक्ति पीठ में अर्बुदा देवी की विधिवत पूजा की जाती है। यहाँ शाक्त परंपरा का विशेष प्रभाव है। विंध्यालेश्वर भैरव को यहाँ का क्षेत्रपाल माना जाता है।

अजमेर में हिंदू, मुस्लिम और सिख तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल हैं। यह सांप्रदायिक सद्भाव का एक उदाहरण है।

वार्षिक उत्सव

अजमेर शक्ति पीठ में नवरात्रि का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पुष्कर मेला भी एक प्रसिद्ध उत्सव है जो नवंबर में आयोजित होता है।

अजमेर में उर्स मेला भी बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यहाँ वर्ष भर विभिन्न धार्मिक उत्सव आयोजित होते रहते हैं।

यात्रा मार्गदर्शन

अजमेर शक्ति पीठ अजमेर शहर में स्थित है। जयपुर से अजमेर सड़क मार्ग से लगभग 135 किलोमीटर दूर है। अजमेर रेलवे जंक्शन भारत के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में से एक है। निकटतम हवाई अड्डा जयपुर का सांगानेर हवाई अड्डा है।

दिल्ली, जयपुर और जोधपुर से अजमेर के लिए नियमित बस और ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं। यात्रा का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

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सती का बायाँ हाथ इस स्थान पर गिरा

— Pithanirnaya
Devi

अर्बुदा देवी — अरावली पर्वत की देवी

— Pithanirnaya
Bhairava

विंध्यालेश्वर भैरव — इस पीठ के क्षेत्रपाल

— Pithanirnaya
Location

अजमेर जिला, राजस्थान, भारत

— Pithanirnaya
Mountain_range

अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में

— Pithanirnaya
Tradition

प्राचीन काल से शाक्त उपासना का केंद्र

— Pithanirnaya
Historical

चौहान वंश काल से प्रसिद्ध

— Pithanirnaya

मतभेद और टिप्पणी

अजमेर शक्ति पीठ के स्थान के संबंध में कुछ परंपराओं में मतभेद हैं। कुछ स्रोत बाएँ हाथ के स्थान में भिन्नता रखते हैं। पुष्कर और अजमेर के बीच भी कुछ भ्रम पाया जाता है।

संपादकीय टिप्पणी:

यह लेख पीठनिर्णय, मार्कण्डेय पुराण और राजस्थान की ऐतिहासिक परंपराओं पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह पीठ राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है। अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में है।

पीठनिर्णय ग्रंथ के अनुसार देवी सती का बायाँ हाथ इस स्थान पर गिरा था।

यहाँ अर्बुदा देवी की पूजा होती है, जो अरावली पर्वत की देवी मानी जाती हैं।

अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, पुष्कर तीर्थ और अनेक मंदिर हैं।

अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है। गर्मियों में बहुत गर्मी पड़ती है।

जयपुर से बस या ट्रेन द्वारा अजमेर पहुँचा जा सकता है। रास्ते में अरावली की सुंदरता देखने को मिलती है।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • राजस्थान के शक्ति पीठ , राजस्थान विश्वविद्यालय
  • राजतरंगिणी — कल्हण
  • अकबरनामा — अबुल फजल
  • पीठनिर्णय
  • अजमेर जिला गजेटियर , राजस्थान सरकार
  • राजस्थान पर्यटन , Rajasthan Tourism [link]
  • देवी भागवत पुराण — वेदव्यास
  • मार्कण्डेय पुराण