वैष्णो देवी पूजा का विशेष महत्व त्रिकूट पर्वत पर विराजमान माता वैष्णो देवी की भक्ति से जुड़ा है। माँ को तीन रूपों — महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — में पूजा जाता है। यह लेख वैष्णो देवी पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, यात्रा की तैयारी और नियम के बारे में है।

वैष्णो देवी का महत्व

परंपरा के अनुसार वैष्णो देवी ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए श्रीराम को भगवान विष्णु के रूप में ध्यान में रखते हुए त्रिकूट पर्वत की गुफा में नौ माह तक ध्यान-तप किया था। इसलिए इन्हें त्रिकूट देवी भी कहा जाता है। माँ की पिंडियाँ (भवन) त्रिकूट पर्वत की गुफा में स्थित हैं। कहा जाता है कि भक्त जिस भावना (महाकाली/महालक्ष्मी/महासरस्वती) से माँ को पुकारता है, माँ उसी रूप में दर्शन देती हैं। वैष्णो देवी पूजन से मनोकामना पूर्ण होने और संकट निवारण की मान्यता है।

वैष्णो देवी की पूजा कब करें?

  • अष्टमी/नवमी: देवी-पूजन के विशेष दिन।
  • नवरात्रि: चैत्रीय और शारदीय नवरात्रि।
  • मंगलवार/शुक्रवार: देवी की पूजा के प्रचलित दिन।
  • यात्रा संकल्प: किसी भी शुभ दिन घर में संकल्प कर पूजा की जा सकती है।

वैष्णो देवी पूजा की सामग्री

  • वैष्णो देवी की मूर्ति/चित्र, आसन,
  • लाल वस्त्र, चुनरी, रोली, कुमकुम, सिंदूर,
  • हल्दी, अक्षत, चंदन, पुष्प, अर्क का फूल,
  • कलश (आम के पत्ते एवं नारियल सहित),
  • नैवेद्य — मिठाई, फल, खीर, पूड़ी-हलवा,
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी, शुद्ध जल।

वैष्णो देवी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। पूजा का संकल्प करें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीवैष्णोदेवीप्रीत्यर्थं
वैष्णोदेवीपूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — वैष्णो देवी का ध्यान-पूजन

माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:

ॐ श्री वैष्णवी देव्यै नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 4 — अर्क पुष्प एवं नारियल अर्पण

माँ को अर्क (आक) का फूल, लाल पुष्प, नारियल और सुहाग-सामग्री अर्पण करें। साथ ही कलश में माँ को जल का अर्घ्य दें।

चरण 5 — माता का मंत्र जप

ॐ श्री वैष्णोदेव्यै नमः।

चरण 6 — चालीसा पाठ एवं आरती

वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करें और माँ की आरती करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

वैष्णो देवी यात्रा की तैयारी

  • यात्रा शुरू करने से पहले पूर्ण संकल्प करें और नियमों का पालन करें।
  • माँ के दर्शन हेतु भवन (गुफा) तक पैदल जाना पड़ता है — उचित जूते और पानी साथ रखें।
  • भवन में शुभ संकल्प, अर्क पुष्प, नारियल आदि के साथ ही दर्शन करें।
  • यात्रा में स्वच्छता एवं सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • दर्शन के बाद माँ का प्रसाद ग्रहण करें।

वैष्णो देवी पूजा के नियम

  • पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा बनाए रखें।
  • माँ को लाल रंग की चुनरी और सुहाग-सामग्री अर्पण करना प्रिय माना गया है।
  • नवरात्रि में वैष्णो देवी की पूजा का विशेष महत्व है।
  • जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान करना यात्रा से पहले उत्तम माना गया है।
  • पूजा का फल श्रद्धा-भक्ति पर निर्भर माना गया है।