तुलसी पूजा का विशेष महत्व हिंदू धर्म में पवित्र पौधे के रूप में है। तुलसी को लक्ष्मी एवं विष्णु-प्रिया माना जाता है और इसकी पूजा नित्य प्रातः तथा विशेषकर कार्तिक मास और गुरुवार को की जाती है। इस लेख में तुलसी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, नाम और नियम सरल भाषा में दिए गए हैं।
तुलसी पूजा का महत्व
परंपरा में तुलसी को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रिय तथा भगवान कृष्ण से जुड़ी पवित्र वनस्पति माना गया है। तुलसी का पौधा घर में लगाना और उसकी नित्य पूजा करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि तुलसी पूजन से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, रोग-संकट दूर होते हैं और विष्णु-लक्ष्मी की कृपा मिलती है। तुलसी विवाह (कार्तिक शुक्ल एकादशी के आसपास) में शालिग्राम के साथ तुलसी के विवाह का विधान है — तुलसी विवाह पूजा विधि पढ़ें।
तुलसी पूजा कब करें?
- नित्य प्रातः: स्नान के बाद प्रतिदिन तुलसी की पूजा का विधान है।
- गुरुवार: तुलसी पूजा का प्रचलित दिन।
- कार्तिक मास: कार्तिक पूर्णिमा तक तुलसी की विशेष पूजा।
- तुलसी विवाह: कार्तिक शुक्ल द्वादशी के आसपास।
- नवरात्रि: नवरात्रि में भी तुलसी पूजन का विशेष महत्व।
तुलसी पूजा की सामग्री
- तुलसी का पौधा/चबूतरा (स्वच्छ),
- जल का पात्र, दीपक (घी/सरसों तेल),
- रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, चंदन,
- तुलसी-दल, फूल (गेंदा/कनेर),
- मिश्री, फल, भोग हेतु सामग्री,
- धूप, कपूर, घंटी, शुद्ध जल।
तुलसी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तुलसी चबूतरे/गमले के चारों ओर पानी से सफाई करें। पूजन का संकल्प करें:
तुलसीपूजनं करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — तुलसी का ध्यान-पूजन
तुलसी माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 4 — तुलसी पूजन मंत्र
तुलसी माता का नित्य पूजन करते समय यह मंत्र बोलें:
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तु ते॥
चरण 5 — तुलसी नामावली (नामोच्चारण)
तुलसी माता के पवित्र नामों का उच्चारण करते हुए पूजन करें:
ॐ तुलसीदेव्यै नमः।
ॐ हरिप्रियायै नमः।
ॐ तुलसीश्रियै नमः।
ॐ वृन्दायै नमः।
चरण 6 — तुलसी नामाष्टक का पाठ
तुलसी माता का नामाष्टक पढ़ें:
पुष्पसारा नन्दनीच तुलसी कृष्ण जीवनी॥
चरण 7 — भोग एवं आरती
तुलसी माता को जल, मिश्री, फल अर्पण करें। तुलसी के पास घी का दीपक जलाएँ। तुलसी माता चालीसा का पाठ करें और तुलसी की आरती करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
तुलसी पूजा के नियम
- तुलसी के पौधे को प्रतिदिन जल दें और सूखे पत्तों की सफाई करें।
- रविवार/पर्व पर तुलसी-दल नहीं तोड़ने का प्रचलन है।
- तुलसी की पूजा में दीपक, जल और फूल-अक्षत प्रमुख हैं।
- तुलसी के सूखे पत्ते पूजा/भोग में प्रयोग करें — अपव्यय न करें।
- तुलसी विवाह में शालिग्राम के साथ तुलसी का पूजन करें।
- स्वच्छता और श्रद्धा से पूजा करें — तुलसी को छूते समय शुद्ध रहें।