सीता माता भगवान श्रीराम की पत्नी और जानकी/वैदेही के रूप में पूजित हैं। इन्हें लक्ष्मी का अवतार और आदर्श नारी का प्रतीक माना गया है। इस लेख में सीता माता पूजा की विधि, सामग्री और महत्व सरल भाषा में दिया गया है।
सीता माता का महत्व
परंपरा में सीता माता को पृथ्वी से उत्पन्न माना गया है, इसलिए इन्हें भूमिजा भी कहा जाता है। राजा जनक की पुत्री होने से जानकी और वैदेह राज्य की राजकुमारी होने से वैदेही कहा जाता है। सीता माता की पूजा पतिव्रत धर्म, सतीत्व और मर्यादा के आदर्श की भावना से की जाती है।
सीता माता की पूजा कब करें?
- नवरात्रि/शुभ अवसर: सीता-राम पूजन प्रचलित है।
- विवाह वर्षगांठ/शुभ कार्य: सीता माता की विशेष पूजा की जा सकती है।
- नित्य: श्रद्धा के अनुसार प्रतिदिन पूजा की जा सकती है।
सीता माता पूजा की सामग्री
- सीता माता की मूर्ति/चित्र, आसन,
- रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, पुष्प,
- लाल/पीला वस्त्र, चुनरी,
- नैवेद्य — खीर, हलवा, फल, नारियल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी।
सीता माता पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प करें:
सीतापूजनं करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — सीता माता का ध्यान-पूजन
सीता माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 4 — सीता माता का मंत्र
तन्नो सीता प्रचोदयात्॥
चरण 5 — चालीसा पाठ एवं आरती
सीता चालीसा का पाठ करें और आरती — आरती श्री जनक दुलारी की — करें। सीता-राम की संयुक्त पूजा सीता-राम पूजा विधि पृष्ठ पर देखें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
सीता माता पूजा के नियम
- सीता माता का पूजन प्रायः श्रीराम के साथ युगल रूप में होता है।
- पूजा में मर्यादा और पवित्रता का भाव रखें।
- नारी शक्ति और सम्मान के प्रति श्रद्धा रखें।