शाकंभरी माता पूजा का विशेष महत्व अन्न और शाक-सब्जियों के रूप में पोषण प्रदान करने वाली देवी के रूप में है। पुराणों के अनुसार सौ वर्षों के अकाल के समय माता ने अपने शरीर से शाक उत्पन्न कर जगत का पोषण किया था। इस लेख में शाकंभरी माता पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, भोग और नियम सरल भाषा में दिए गए हैं।
शाकंभरी माता का महत्व
परंपरा के अनुसार शाकंभरी देवी ने अकाल के समय जगत को अन्न-शाक प्रदान कर जीवों का पोषण किया था — "शाक" (सब्जियाँ) और "अम्भरी" (धारण करने वाली) से इनका नाम शाकंभरी पड़ा। देवी भागवत/दुर्गा सप्तशती के एकादश अध्याय में इनका वर्णन मिलता है। यह पूजा पोषण, समृद्धि और कल्याण की कामना से की जाती है। इनके प्रसिद्ध स्थलों में सहारनपुर के पास शाकंभरी देवी मंदिर शामिल है।
शाकंभरी माता की पूजा कब करें?
- शाकंभरी पूर्णिमा: देवी का प्रमुख पर्व।
- नवरात्रि: शारदीय नवरात्रि के अष्टमी आदि दिनों में विशेष पूजा।
- किसी भी शुभ दिन: श्रद्धा के अनुसार पूजा की जा सकती है।
शाकंभरी माता पूजा की सामग्री
- शाकंभरी देवी की मूर्ति/चित्र, आसन,
- लाल वस्त्र (चौकी के लिए), कलश (आम के पत्ते और नारियल सहित),
- हरी सब्जियाँ — पालक, धनिया, बैंगन, गाजर आदि,
- हरे वस्त्र और हरे पुष्प,
- रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, चंदन, पुष्प,
- नैवेद्य — हलवा, पूड़ी, शाक, फल, नारियल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी, शुद्ध जल।
शाकंभरी माता पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर चौकी स्थापित करें और उस पर माता की मूर्ति/चित्र रखें। पूजा का संकल्प करें:
शाकंभरीपूजनं करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — शाकंभरी माता का ध्यान-पूजन
देवी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 4 — शाक एवं अन्न का अर्पण
माता शाकंभरी को हरी सब्जियाँ और फल अर्पण करें। साथ ही माता को हरे वस्त्र और हरे पुष्प चढ़ाएँ। देवी को अर्पित शाक को सात्विक भोजन के रूप में प्रसाद मानकर ग्रहण करें। देवी माता का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें:
भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः॥
चरण 5 — देवी मंत्र जप
चरण 6 — चालीसा पाठ एवं आरती
देवी को समर्पित चालीसा एवं आरती का पाठ करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
शाकंभरी माता पूजा के नियम
- पूजा में अन्न-शाक का महत्व दर्शाते हुए अपव्यय से बचें।
- पूजा के दिन अन्न दान का विशेष महत्व माना गया है।
- हरी सब्जियाँ अर्पण करते समय ताज़ा और स्वच्छ शाक ही चढ़ाएँ।
- स्वच्छता और सात्विक भाव बनाए रखें।
- प्रसाद (शाक, हलवा-पूड़ी) परिवार और पड़ोस में वितरण करें।