रथ सप्तमी (सूर्य सप्तमी/अचला सप्तमी/सूर्य जयंती) माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। यह भगवान सूर्य के पूजन का विशेष पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य अपने दिव्य रथ पर सवार होकर पहली बार पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। इस लेख में रथ सप्तमी पूजा की संपूर्ण विधि, स्नान, अर्घ्य, सामग्री, मंत्र और नियम की विस्तृत जानकारी दी गई है।

रथ सप्तमी का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य ने अपने सात घोड़ों वाले दिव्य रथ से जगत को प्रकाशित किया था, इसलिए इसे सूर्य जयंती और अचला सप्तमी भी कहा जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने सूर्य को संसार के प्रत्यक्ष देवता बताया है। इस दिन सूर्य की उपासना, स्नान, दान और अर्घ्य देने से आरोग्य, तेज, धन, यश और संतान सुख की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने और आक के पत्ते सिर पर रखने से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

रथ सप्तमी पूजा कब करें?

  • रथ सप्तमी: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी।
  • स्नान काल: सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त) में स्नान करना शुभ माना गया है।
  • अर्घ्य: सूर्योदय के समय (सूर्य को अर्घ्य देने का समय)।
  • पूजा काल: प्रातः से मध्याह्न तक का समय शुभ माना जाता है।

रथ सप्तमी पूजा की सामग्री

  • जल से भरा ताम्र (तांबे) का लोटा/पात्र,
  • लाल चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी,
  • लाल पुष्प (गुलाब/गुड़हल), दूर्वा,
  • गुड़, गन्ना, लाल वस्त्र,
  • आक (मदार) के सात पत्ते, बेर के सात पत्ते,
  • तिल का तेल, दीपक, बाती, कपूर, घी,
  • फल, मिठाई (नैवेद्य), नारियल,
  • गंगाजल, पंचामृत, शुद्ध जल,
  • दान सामग्री — अन्न, वस्त्र, गुड़, फल।

रथ सप्तमी पूजा विधि (संपूर्ण क्रम)

रथ सप्तमी की पूजा मुख्य रूप से स्नान, अर्घ्य और सूर्य पूजन पर आधारित है। संपूर्ण क्रम निम्न है:

चरण 1 — ब्रह्म मुहूर्त में स्नान

रथ सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करें। स्नान के समय सिर पर आक के सात पत्ते और बेर के सात पत्ते रखें — ऐसा करने से सात जन्मों के पाप नष्ट होने की मान्यता है। तिल-तैल के दीपक को कुसम्बा की बत्ती के साथ जलाकर नदी/जल में प्रवाहित करने की परंपरा भी है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

चरण 2 — सूर्य को अर्घ्य

तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। उसमें लाल चंदन, कुमकुम, लाल पुष्प, अक्षत और थोड़ा सा गुड़ मिलाएं। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके नंगे पैर खड़े हों और जल की धारा सूर्य को अर्पित करें। ध्यान रखें कि जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें। अर्घ्य देते समय मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ घृणिः सूर्याय नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥

चरण 3 — सूर्य देव का पूजन

घर में पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें। सूर्य देव का ध्यान कर संकल्प लें:

ममाखिल-कामना-सिद्ध्यर्थं सूर्यनारायण-प्रीत्यर्थं सूर्य-पूजनं करिष्ये।

सूर्य देव का पूजन करते हुए सभी उपचार अर्पित करें:

ॐ सूर्याय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — मंत्र जाप एवं स्तोत्र पाठ

पूजा के दौरान 'ॐ घृणिः सूर्याय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। संभव हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें।

ॐ घृणिः सूर्याय नमः।

चरण 5 — दीप प्रज्वलन एवं नैवेद्य

सूर्य नारायण के निमित्त तिल के तेल का दीपक जलाएं। गुड़, गन्ना, फल और मिठाई का नैवेद्य अर्पित करें। नैवेद्य अर्पण के समय मंत्र का उच्चारण करें:

ॐ सूर्याय नमः नैवेद्यं समर्पयामि।

चरण 6 — आरती एवं दान

पूजा के अंत में सूर्य देव की आरती करें और प्रसाद वितरण करें। इस दिन अपाहिज, गरीब और ब्राह्मणों को यथा शक्ति अन्न, वस्त्र, गुड़ आदि का दान करें। सूर्य की उपासना की विस्तृत विधि सूर्य पूजा विधि एवं सूर्य अर्घ्य विधि लेख में देखें।

रथ सप्तमी पूजा के नियम

  • स्नान सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त) में करें।
  • अर्घ्य सूर्योदय के समय ही दें — देर से अर्घ्य देना वर्जित माना गया है।
  • अर्घ्य देते समय जल पैरों पर न गिरे; नीचे पात्र रखें। अर्घ्य का जल बाद में किसी पौधे की जड़ में डालें।
  • बिना स्नान किए सूर्य को जल न चढ़ाएं।
  • पूजा के समय जूते-चप्पल न पहनें।
  • व्रत रखने वाले इस दिन एक समय नमक रहित भोजन या फलाहार करें।
  • इस दिन नीले वस्त्र धारण न करें।
  • सूर्य को अर्घ्य देने की सामान्य विधि के लिए सूर्य अर्घ्य विधि लेख देखें।

रथ सप्तमी के दिन विधिवत स्नान, अर्घ्य और सूर्य पूजन करने से आरोग्य, तेज, यश, धन और संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सूर्य की तरह निरंतर उन्नति बनी रहती है।