परशुराम जी भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं — अत्याचारी क्षत्रियों के संहारक और शस्त्र-विद्या के आचार्य। इन्हें भृगुवंशी या जमदग्निपुत्र भी कहा जाता है। इस लेख में परशुराम जी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, परशुराम जयंती पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

परशुराम जी का महत्व

परंपरा के अनुसार परशुराम जी ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र हैं। उन्होंने पृथ्वी से अत्याचार का नाश करने के लिए परशु (फरसा) धारण किया, इसलिए इन्हें परशुराम कहा जाता है। इन्हें ब्रह्म-क्षत्रिय (शस्त्र और शास्त्र दोनों में कुशल) माना गया है। परशुराम जयंती (वैशाख शुक्ल तृतीया) के दिन विशेष पूजन होता है। मान्यता है कि परशुराम जी की पूजा से शत्रु-भय की शांति, शौर्य, बल और धर्म की रक्षा की प्रेरणा मिलती है।

परशुराम जी पूजा कब करें?

  • परशुराम जयंती: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) के दिन विशेष पूजन होता है।
  • प्रातःकाल: परशुराम जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा की जाती है।
  • अक्षय तृतीया: इसी तिथि के कारण इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है।

परशुराम जी पूजा की सामग्री

  • परशुराम जी की प्रतिमा/चित्र, पीला वस्त्र,
  • परशु (फरसा/कुल्हाड़ी) या शस्त्र (पूजन हेतु),
  • पीले फूल, पीला चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत,
  • घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती, कपूर,
  • नैवेद्य: मिठाई, फल, गुड़-चना (अक्षय तृतीया की परंपरा),
  • गंगाजल, पान, सुपारी, लौंग।

परशुराम जी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

परशुराम जयंती के दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और परशुराम प्रतिमा/चित्र को चौकी पर स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें:

ॐ परशुरामाय नमः पूजनं करिष्ये। ॐ गणं गणपतये नमः।

चरण 2 — पूजन एवं तिलक

परशुराम जी की प्रतिमा पर चंदन का तिलक लगाएँ, अक्षत-पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएँ। पीले फूल चढ़ाएँ। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:

ॐ परशुरामाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 3 — परशु/शस्त्र पूजन

परशुराम जी के शस्त्र का प्रतीक होने के कारण परशु (फरसा) या परिवार में रखे शस्त्र को भी पूजा में रखकर उसका पूजन करें। शस्त्र पर तिलक लगाकर फूल चढ़ाएँ — यह परशुराम पूजा का विशेष उपचार है:

ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नमः।

चरण 4 — परशुराम गायत्री का जाप

पूजन के बाद परशुराम गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें:

ॐ जमदग्नये विद्महे महावीराय धीमहि। तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्॥

चरण 5 — नैवेद्य एवं आरती

परशुराम जी को मिठाई, फल और गुड़-चना का नैवेद्य अर्पित करें। फिर आरती करें और प्रसाद परिवार में वितरण करें। श्रद्धा अनुसार परशुराम चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। परशुराम जयंती के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है — सामर्थ्यानुसार अन्न, वस्त्र या गुड़-चने का दान करें।

परशुराम जी पूजा के नियम

  • परशुराम जयंती के दिन उपवास या फलाहार रखें।
  • पूजा में पीले वस्त्र और पीले फूल शुभ माने गए हैं।
  • सात्विक नैवेद्य ही चढ़ाएँ; मांस-मदिरा वर्जित है।
  • शस्त्र पूजन श्रद्धा से करें — शस्त्र का दुरुपयोग न करें।
  • इस दिन क्रोध और हिंसा से बचें; धर्म की रक्षा की भावना रखें।
  • दान-पुण्य के बिना परशुराम जयंती पूजा अधूरी मानी गई है।