नर्मदा पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि नर्मदा को शिव की पुत्री और मोक्षदायिनी नदी माना गया है। नर्मदा के पत्थरों (नर्मदेश्वर/बाणलिंग) को स्वयंभू शिवलिंग मानकर पूजा जाती है। इस लेख में नर्मदा माता पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, दीपदान और नियम सरल भाषा में दिए गए हैं।
नर्मदा पूजा का महत्व
परंपरा के अनुसार नर्मदा भगवान शिव के तप से उत्पन्न मानी जाती हैं, इसलिए इन्हें शिवजा, रेवा और कुंवारी नदी भी कहा जाता है। नर्मदा के जल में नर्मदेश्वर शिवलिंग (बाणलिंग) प्राप्त होते हैं, जिनकी घर में स्थापना कर शिव-नर्मदा की संयुक्त पूजा की जाती है। नर्मदा की परिक्रमा (नर्मदा परिक्रमा) को अत्यंत पुण्यप्रद माना गया है। नर्मदा पूजन से शिव की कृपा, मनोकामना पूर्ति और पापों का नाश माना गया है।
नर्मदा पूजा कब करें?
- नर्मदा जयंती: पंचांग के अनुसार निर्धारित तिथि पर विशेष पूजन।
- श्रावण मास / शिव संबंधी पर्व: सावन सोमवार, महाशिवरात्रि आदि पर नर्मदेश्वर पूजन।
- नित्य/शुभ अवसर: नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा किसी भी दिन की जा सकती है।
- नर्मदा परिक्रमा: विशेष तीर्थ यात्रा का महत्व।
नर्मदा पूजा की सामग्री
- नर्मदा माता की मूर्ति/चित्र या नर्मदेश्वर शिवलिंग (बाणलिंग),
- कलश में जल (संभव हो तो नर्मदा जल), आसन,
- रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, चंदन, पुष्प,
- दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत हेतु),
- आटा (आटे के दीये हेतु — 11),
- नैवेद्य — गुड़, हलवा, फल, मिश्री, नारियल,
- धूप, दीप, कपूर, घंटी, शंख।
नर्मदा पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो नर्मदा जल के मिश्रण से स्नान करें। नर्मदा माता के पूजन का संकल्प करें:
नर्मदापूजनं करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण
चरण 3 — नर्मदा माता का ध्यान-पूजन
नर्मदा माता का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 4 — नर्मदा माता का ध्यान-मंत्र
चरण 5 — नर्मदा स्तुति
नर्मदा माता की प्रसिद्ध स्तुति का पाठ करें, जिसमें सभी पवित्र नदियों की तुलना में नर्मदा की पुण्यता का वर्णन है:
ग्रामे वा यदि वारण्ये नर्मदा सर्वतः पुण्या॥
चरण 6 — दीपदान एवं भोग
नर्मदा तट पर या नर्मदा जल-कलश के समीप गेहूँ/चावल के आटे से बने 11 दीये प्रज्वलित करें। नर्मदा माता को गुड़-हलवा का भोग लगाएँ। यदि नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा कर रहे हों तो जल-दूध से अभिषेक करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना करें:
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
नर्मदा पूजा के नियम
- नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा में दूध-जल का अभिषेक प्रचलित है।
- नर्मदा पूजन में आटे के दीये जलाने की विशेष परंपरा है।
- नर्मदा की स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखें।
- पूजा श्रद्धा और स्वच्छता के साथ करें।
- नर्मदा जल को शुद्ध स्थान पर रखें और उपयोग में लाएँ।
- नर्मदा परिक्रमा का संकल्प अपनी क्षमता के अनुसार ही लें।