नरसिंह जयंती (नृसिंह जयंती) वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। भगवान विष्णु ने इसी दिन नरसिंह (आधे सिंह, आधे मनुष्य) अवतार धारण कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। इस लेख में नरसिंह जयंती पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, मुहूर्त और नियम बताए गए हैं।

नरसिंह जयंती का महत्व

राक्षसराज हिरण्यकशिपु के अत्याचार से मुक्ति के लिए भक्त प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की आराधना की। क्रोधित हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अनेक कष्ट दिए, परंतु भगवान ने वैशाख शुक्ल चतुर्दशी की संध्या पर नरसिंह अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा की और हिरण्यकशिपु का वध किया। भगवान नरसिंह भक्तों की रक्षा और भय-संकट के नाश के देवता माने जाते हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और जीवन के भय से मुक्ति मिलती है।

नरसिंह जयंती कब मनाई जाती है?

  • नरसिंह जयंती: वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि।
  • पूजा समय: भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्या (गोधूलि बेला) में हुआ था, इसलिए संध्या काल में पूजा करना सबसे शुभ माना गया है। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है।

नरसिंह जयंती पूजा की सामग्री

  • भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र (वैकल्पिक रूप से विष्णु जी का चित्र),
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, मिश्री),
  • पीला वस्त्र, चंदन, कुमकुम, हल्दी, अक्षत,
  • पीले फूल, फूल माला, तुलसी दल,
  • गुड़, चना, फल, मिठाई (नैवेद्य),
  • घी, दीपक, धूप, कपूर।

नरसिंह जयंती पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके व्रत-पूजन का संकल्प लें:

ॐ नृसिंहाय नमः संकल्पमहं करिष्ये।

चरण 2 — चौकी स्थापना

पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल, सफेद या पीला वस्त्र बिछाएँ और भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। प्रतिमा न हो तो भगवान विष्णु का चित्र भी स्थापित किया जा सकता है।

चरण 3 — गणेश पूजन

पूजा के आरंभ में भगवान गणेश का पूजन करें:

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 4 — अभिषेक एवं श्रृंगार

भगवान नरसिंह की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करें और पीले वस्त्र पहनाएँ। चंदन, कुमकुम, हल्दी, पीले पुष्प, तुलसी दल और फूल माला अर्पित करें। फल, मिठाई और गुड़-चना का नैवेद्य लगाएँ। पूजन करते समय मंत्र का जाप करें:

ॐ नृसिंहाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] के स्थान पर उस समय अर्पित की जा रही वस्तु का नाम बोलें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि।

चरण 5 — मंत्र जाप

संध्या काल की पूजा में नरसिंह सुरक्षा मंत्र और नरसिंह गायत्री मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें:

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
ॐ वज्रनखाय विद्महे, तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि।
तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥

चरण 6 — कथा श्रवण

भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कथा का पाठ या श्रवण करें। संभव हो तो नरसिंह कवच का पाठ करें, जो सभी बाधाओं से रक्षा करने वाला माना गया है।

चरण 7 — आरती एवं प्रसाद

घी का दीपक जलाकर भगवान नरसिंह की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें। पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें। गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करना विशेष शुभ माना गया है।

नरसिंह जयंती पूजा के नियम

  • संध्या काल में पूजा करना सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि भगवान का प्राकट्य गोधूलि बेला में हुआ था।
  • व्रत के दिन अन्न और तामसिक भोजन वर्जित है, फलाहार करें।
  • पूजा में पीले वस्त्र, पीले पुष्प और पीला चंदन अर्पित करें।
  • भगवान नरसिंह को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
  • व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करें।