नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा करने से सर्प-भय, कालसर्प दोष तथा राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में इस पर्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में नाग पंचमी पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र और नियम की विस्तृत जानकारी दी गई है।
नाग पंचमी का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार राजा जनमेजय के नाग यज्ञ को आस्तिक मुनि ने रोका था, और तभी से नाग देवता ने यह वचन दिया कि श्रावण मास की पंचमी तिथि को जो व्यक्ति नाग को दूध अर्पित कर उनकी पूजा करेगा, उसके परिवार पर नाग-वंश का भय नहीं रहेगा। मान्यता है कि नाग पंचमी पर नाग देवताओं — विशेषकर अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर और धृतराष्ट्र — की पूजा करने से धन-वैभव बढ़ता है, सर्पदंश का भय दूर होता है और वंश में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन भगवान शिव का पूजन भी किया जाता है, क्योंकि शिव जी के गले में नागराज विराजमान हैं।
नाग पंचमी पूजा कब करें?
- नाग पंचमी: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी।
- पूजा काल: प्रातः काल (शुभ मुहूर्त में) पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
- आरती काल: कई क्षेत्रों में इस दिन दोपहर बाद नाग पूजा करने की परंपरा है। सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
नाग पंचमी पूजा की सामग्री
- नाग देवता की प्रतिमा या चित्र (चांदी, लकड़ी, पत्थर या मिट्टी का),
- गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत हेतु),
- खील (लावा), खीर, गुड़, मिठाई, फल,
- हल्दी, रोली, कुमकुम, चंदन, सिंदूर,
- अक्षत (चावल), पुष्प (मालती, चमेली, गेंदा), तुलसी दल, दूर्वा,
- बेलपत्र, धतूरा, आम्र मंजरी, जौ की बालें (शिव पूजन हेतु),
- धूप, घी का दीपक, कपूर, अगरबत्ती,
- गंगाजल, इत्र, मौली (कलावा), जनेऊ,
- पान-सुपारी, नारियल, पंच मेवा, अंकुरित अनाज, दालें।
नाग पंचमी पूजा विधि (संपूर्ण क्रम)
नाग पंचमी की पूजा घर पर सरलता से की जा सकती है। संपूर्ण क्रम निम्न है:
चरण 1 — स्नान, शुद्धिकरण एवं संकल्प
प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर में गंगाजल का छिड़काव करें। घर के मुख्य द्वार पर पीली मिट्टी या गोबर से सर्प की आकृति बनाएं — यह नाग देवता का प्रतीक मानी जाती है। पूजा का संकल्प लें:
चरण 2 — नाग देवता का आवाहन
पूजा स्थल पर नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दाहिने हाथ में अक्षत लेकर 'आवाहयामि' कहते हुए नाग देवता का आवाहन करें। अनंत आदि नागों का नाम-मंत्र कहते हुए आवाहन करें:
ॐ वासुकये नमः। वासुकिम् आवाहयामि।
ॐ शेषाय नमः। शेषम् आवाहयामि।
ॐ शङ्खाय नमः। शङ्खम् आवाहयामि।
ॐ पद्माय नमः। पद्मम् आवाहयामि।
ॐ कम्बलाय नमः। कम्बलम् आवाहयामि।
ॐ कर्कोटकाय नमः। कर्कोटकम् आवाहयामि।
ॐ अश्वतराय नमः। अश्वतरम् आवाहयामि।
ॐ धृतराष्ट्राय नमः। धृतराष्ट्रम् आवाहयामि।
ॐ तक्षकाय नमः। तक्षकम् आवाहयामि।
ॐ कालियाय नमः। कालियम् आवाहयामि।
ॐ कपिलाय नमः। कपिलम् आवाहयामि।
नोट: जिन्हें विस्तृत आवाहन संभव न हो, वे 'ॐ नागाय नमः' मंत्र से ही नाग देवता का ध्यान-पूजन कर सकते हैं।
चरण 3 — नाग देवता का पूजन
नाग देवता की प्रतिमा को दूध से स्नान कराएं (प्रतीकात्मक रूप से दूध अर्पित करें), हल्दी-सिंदूर का लेप लगाएं और फूल चढ़ाएं। 'अनंतादि नागदेवताभ्यो नमः' मंत्र कहते हुए सभी उपचार अर्पित करें:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
चरण 4 — नैवेद्य अर्पण
नाग देवता को दूध, खील (लावा), खीर, मिठाई, अंकुरित अनाज और फल का नैवेद्य अर्पित करें। दूध अर्पित करते समय ध्यान रखें कि नागों को दूध पिलाना नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करना शुभ माना जाता है। नैवेद्य अर्पण के समय मंत्र का उच्चारण करें:
चरण 5 — भगवान शिव का पूजन
नाग पंचमी पर भगवान शिव का पूजन करना शुभ माना गया है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं। शिव मंदिर जाकर शिव जी को चंदन की सात गोलियां चढ़ाने से विशेष पुण्य माना गया है। रुद्राभिषेक की विस्तृत विधि रुद्राभिषेक विधि लेख में देखें।
चरण 6 — मंत्र जाप एवं आरती
नाग पंचमी पर नाग गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें:
कालसर्प दोष या राहु-केतु दोष हो तो 'ॐ नागदेवाय नमः' मंत्र का भी 108 बार जाप करें। पूजा के अंत में नाग देवता की आरती करें। विसर्जन से पहले नाग देवता से क्षमा प्रार्थना करें:
न्यूनातिरिक्तं तत्सर्वं भो नागाः क्षन्तुमर्हथ।
नाग पंचमी पूजा के विशेष नियम
- नाग देवता को प्रतीकात्मक रूप से दूध अर्पित करें; वास्तविक सर्प को दूध पिलाना खतरनाक हो सकता है, अतः उससे बचें।
- इस दिन नाग देवता की पूजा सात्विक भाव से और श्रद्धापूर्वक करें।
- कुछ क्षेत्रों में इस दिन खेत-खलिहान, घर के आंगन अथवा मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाकर पूजा का प्रचलन है।
- पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
- यथा शक्ति जरूरतमंदों को भोजन या दान करना शुभ माना गया है।
- भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन नाग पूजा से परिवार में सद्गति और नाग-कुल की कृपा प्राप्त होती है।
- विस्तृत सामग्री सूची के लिए पूजा सामग्री सूची लेख देखें।
नाग पंचमी के दिन नाग देवता और भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से सर्प-भय से मुक्ति, ग्रह दोषों की शांति और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।