महानवमी नवरात्रि का नौवाँ और अंतिम मुख्य पूजन-दिवस है। इस दिन प्रचलित क्रम में माँ दुर्गा के रूप सिद्धिदात्री की पूजा होती है। महानवमी को हवन, कन्या पूजन और भोग का विशेष महत्व है — यह अष्टमी के बाद का मुख्य दिन है और दशहरा (विजयादशमी) इसी के अगले दिन आता है। इस लेख में महानवमी की पूजा विधि, हवन, कन्या पूजन, भोग और नियम दिए गए हैं।

पूरी नवरात्रि की विधि नवरात्रि पूजा विधि, अष्टमी की विधि दुर्गा अष्टमी पूजा विधि और कन्या पूजन कन्या पूजन विधि पृष्ठ पर देखें।

महानवमी का महत्व

महानवमी को सिद्धिदात्री पूजा का दिन माना गया है। परंपरा में इस दिन देवी की विशेष सिद्धि-उपासना और संकल्प-पूर्ति की भावना जुड़ी है। अष्टमी-नवमी की संधि-पूजा, हवन और कन्या पूजन का प्रचलन मुख्यतः इन्हीं दिनों होता है। महानवमी के बाद दशमी को नवरात्रि समाप्त होती है।

महानवमी पूजा की तैयारी

  • नौ दिनों की स्थापना बनी रहती है — घटस्थापना देखें।
  • हवन-सामग्री (समिधा, आहुति-सामग्री)।
  • कन्या पूजन हेतु भोजन-प्रसाद की व्यवस्था।
  • पूजा सामग्री — रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, कपूर।

महानवमी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजन-व्रत का संकल्प करें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं
महानवमीपूजां करिष्ये।

चरण 2 — सिद्धिदात्री का ध्यान एवं पूजन

नवमी के दिन सिद्धिदात्री रूप का ध्यान करते हुए सामान्य दुर्गा-उपचार करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रचलित प्रारूप:

ॐ दुर्गायै नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 3 — दुर्गा मंत्र जप

ॐ दुर्गायै नमः।
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि।
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥

चरण 4 — हवन

महानवमी का हवन कई स्थानों का प्रमुख कर्म है। हवन में दुर्गा मंत्रों के साथ समिधा-आहुतियाँ दी जाती हैं। हवन का सही क्रम जानने के लिए विधि-जानकार पंडित की सहायता लेना उचित है।

चरण 5 — कन्या पूजन

महानवमी को कन्या पूजन का विशेष प्रचलन है — संपूर्ण विधि कन्या पूजन विधि पृष्ठ पर देखें।

चरण 6 — विशेष भोग

नवमी के दिन देवी को पूड़ी-हलवा-चने का भोग लगाने की परंपरा है (क्षेत्रीय)। इसके बाद ही प्रसाद वितरित किया जाता है।

चरण 7 — चालीसा पाठ एवं आरती

शाम को दुर्गा चालीसा पाठ और आरती — जय अम्बे गौरी — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

महानवमी के नियम

  • महानवमी व्रत स्वास्थ्य के अनुसार रखें; बीमार, वृद्ध और बच्चों के लिए व्रत अनिवार्य नहीं।
  • हवन और कन्या पूजन का क्रम पारिवारिक/क्षेत्रीय पद्धति के अनुसार रखें।
  • अष्टमी-नवमी की संधि-पूजा का समय पंचांग देखें।
  • दशमी (विजयादशमी) के दिन नवरात्रि-पूर्णाहुति और कलश-विसर्जन होता है।

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