जय गोरखनाथ महाराज गोरखनाथ जी की प्रचलित आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ दिया गया है।

जय गोरखनाथ महाराज — गोरखनाथ आरती का महत्व

गोरखनाथ जी नाथ संप्रदाय के प्रमुख सिद्ध योगी और मछिंद्रनाथ के शिष्य थे। उन्हें अवधूत वेश धारण किए, कानों में कुंडल और सिंदूर लगाए बाल योगी के रूप में पूजा जाता है। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजा होती है।

आरती

जय गोरखनाथ महाराज, जय गोरखनाथ महाराज।जय जय अवधूत, जय जय अवधूत, शंकर के अवतार॥ ॥ जय गोरखनाथ महाराज..॥
जन्म लिया आपने गौरतल से, जगत को तारने।माता पिता के रूप में, जगत को निहारने॥ ॥ जय गोरखनाथ महाराज..॥
कुण्डल कानों धरते, सिंदूर लगाते ।गेरूआ वस्त्र धारण, जटा विराजती ॥ ॥ जय गोरखनाथ महाराज..॥
गोरखपुर के धाम में, आप विराजते ।भक्त जनों की मनोकामना, सब पूरी करते ॥ ॥ जय गोरखनाथ महाराज..॥
जय गोरखनाथ महाराज, जय गोरखनाथ महाराज।जय जय अवधूत, जय जय अवधूत, शंकर के अवतार॥
आरती का समय
प्रतिदिन, विशेषतः गोरखनाथ जयंती पर

आरती विधि

गोरखनाथ जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें।

संदर्भ: भक्ति टक — bhaktitak.com

लाभ

मनोबल और साहस की प्राप्ति।
भय से मुक्ति।
योग-सिद्धि में सहायता।