भगवान दत्तात्रेय त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और शिव — के संयुक्त अवतार माने जाते हैं। इन्हें अवधूत, गुरु देव और अविनाशी भी कहा जाता है। इस लेख में दत्तात्रेय जी की पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, दत्त जयंती पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
भगवान दत्तात्रेय का महत्व
परंपरा के अनुसार दत्तात्रेय ऋषि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हैं। इनके तीन मुख — ब्रह्मा, विष्णु, शिव — तथा चार कुत्ते (चार वेद) के साथ का स्वरूप प्रचलित है। दत्तात्रेय को ज्ञान, वैराग्य और गुरु परंपरा के देवता माना गया है। दत्त जयंती (मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा) के दिन विशेष पूजन होता है। मान्यता है कि दत्तात्रेय की पूजा से ज्ञान, वैराग्य, मोक्ष और गुरु की कृपा की प्राप्ति होती है।
भगवान दत्तात्रेय पूजा कब करें?
- दत्त जयंती: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है।
- दत्त पूर्णिमा: इसी तिथि को दत्त पूर्णिमा भी कहा जाता है — गुरु-परंपरा का प्रमुख पर्व।
- मासिक पूर्णिमा: प्रत्येक पूर्णिमा को दत्तात्रेय जी की पूजा करना शुभ माना गया है।
- गुरुवार: गुरुवार को दत्तात्रेय पूजा भी विशेष फलदायी मानी गई है।
भगवान दत्तात्रेय पूजा की सामग्री
- दत्तात्रेय भगवान की प्रतिमा/चित्र, लाल या पीला वस्त्र,
- तीन दीपक (त्रिमूर्ति के प्रतीक), धूप, कपूर,
- चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत,
- औदुंबर वृक्ष के पत्ते, पुष्प,
- नैवेद्य: मिठाई, फल, अक्षत,
- हवन हेतु (वैकल्पिक): आम की लकड़ी, तिल, जौ, घी।
भगवान दत्तात्रेय पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — स्नान एवं संकल्प
दत्त जयंती के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और दत्तात्रेय प्रतिमा/चित्र को चौकी पर स्थापित करें। पूजा का संकल्प लें:
चरण 2 — तीन दीपक एवं पूजन
त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) के प्रतीक के रूप में तीन दीपक जलाएँ। दत्तात्रेय प्रतिमा पर चंदन का तिलक लगाएँ, अक्षत-पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप दिखाएँ। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।
चरण 3 — दत्तात्रेय मंत्र का जाप
पूजन के बाद दत्तात्रेय बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें:
चरण 4 — दत्त गायत्री का जाप
अधिक लाभ के लिए दत्त गायत्री मंत्र का जप करें:
चरण 5 — औदुंबर वृक्ष की पूजा (वैकल्पिक)
दत्तात्रेय भगवान की प्रिय वृक्ष औदुंबर (गूलर) को माना गया है। संभव हो तो औदुंबर वृक्ष को जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करें। रक्षा एवं ज्ञान के लिए दत्तात्रेय वज्र कवच या दत्तात्रेय चालीसा का पाठ किया जा सकता है। इसके बाद नैवेद्य अर्पित कर आरती करें। संभव हो तो हवन करें और सामर्थ्यानुसार अन्न, वस्त्र या मिठाई का दान करें।
भगवान दत्तात्रेय पूजा के नियम
- दत्त जयंती के दिन उपवास रखें और रात्रि जागरण/भजन करें।
- दत्तात्रेय जी को अक्षत, फूल, फल और मिष्ठान अर्पित करना विशेष शुभ माना गया है।
- औदुंबर वृक्ष को कभी न काटें; इसकी पूजा-परिक्रमा लाभकारी मानी गई है।
- पूजा में सात्विक नैवेद्य ही चढ़ाएँ; मांस-मदिरा वर्जित है।
- दत्तात्रेय जी को गुरु देव कहा गया है — गुरु/वरिष्ठों का सम्मान रखें।
- दान-पुण्य के बिना दत्त जयंती की पूजा अधूरी मानी गई है।