दत्तात्रेय चालीसा त्रिमूर्ति अवतार भगवान दत्तात्रेय की महिमा का वर्णन करने वाला स्तोत्र है। इसका पाठ पितृ दोष, काल सर्प दोष और संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है।
प्रारंभिक दोहा / मंगलाचरण
दत्तात्रेय प्रभु चरणन में, करूँ बारम्बार प्रणाम॥
ज्ञान वैराग्य के सागर, दिगम्बर अवधूत।॥
शरण तुम्हारी आया हूँ, हरो सकल भव-भूत॥
दत्तात्रेय चालीसा
ब्रह्मा विष्णु शिव त्रय अवतारा। एक देह में रूप अपारा॥
अत्रि ऋषि के प्रिय अनुज नाथा। अनुसूया माता सुविख्याता॥
तीन शीश षट् भुज सुखकारी। दिगम्बर रूप अनुपम धारी॥
दाहिन हाथ त्रिशूल कमंडल। रुद्राक्षमाल शोभित मंगल॥
बाम भुज चक्र शंख सुशोभे। देखत रूप सुर नर मन मोहे॥
चार कुत्ते चारों वेद जानो। कामधेनु संग विराजत मानो॥
भस्म रमाये जटाजूट धारी। अवधूत अनघ महिमा भारी॥
चौबीस गुरु जग से सीखा ज्ञाना। पृथ्वी जल वायु से पाया माना॥
सूर्य चंद्र आकाश महासागर। मधुमक्खी अजगर चातक चंचल॥
राजा यदु को उपदेश दीन्हा। उद्धव गीता का ज्ञान अर्पिन्हा॥
श्रीमद् भागवत में लीला गाई। आदिगुरु की महिमा अकथनी भाई॥
परशुराम को विद्या दीन्हीं। कार्तवीर्य अर्जुन की सिद्धि लीन्हीं॥
सहस्रार्जुन हो भक्त मनाया। दत्त प्रभु ने मोक्ष-पथ दिखाया॥
पितृ दोष जिनको जग सतावे। दत्त नाम लेत दुख मिट जावे॥
काल सर्प दोष भी हरते स्वामी। भक्त जनों के अन्तर्यामी॥
शनि राहु केतु के पीड़ित जन। दत्त शरण लें होय शान्त मन॥
गुरुवार को पाठ जो नित्य करे। जीवन के सब संकट से उबरे॥
अवधूतगीता सार तुम्ही हो। जीवन्मुक्त स्वरूप तुम्ही हो॥
त्रिपुरा रहस्य ज्ञान-धाम। दत्त प्रभु तेरा ही नाम॥
भिक्षा माँग औदुम्बर वृक्ष तले। दत्त दर्शन से भव-बाधा टले॥
सात वार परिक्रमा जो करे। दत्त प्रसाद सहज उसे मिले॥
माँ अनुसूया ने तप कर पाया। त्रिदेव शिशु रूप में घर आया॥
ब्रह्मा-हरि-हर एक हो गये। दत्त नाम से जग में छा गये॥
रोग शोक दुख भय सब हारे। दत्त नाम लेत भक्त उबारे॥
जो नर इस चालीसा को गावे। दत्तात्रेय की कृपा वह पावे॥
जय जय जय दत्त दिगम्बर स्वामी। जय त्रिमूर्ति जय अन्तर्यामी॥
दत्त चालीसा नित जो पढ़े। ज्ञान-मुक्ति-भक्ति सदा बढ़े॥
समापन दोहा
पितृ दोष हरि मुक्ति दे, खुले ज्ञान के रोज॥
अत्रि-नन्दन दत्त प्रभु, करहु कृपा अपार।॥
भक्त जनों को मोक्ष दो, उतरें भव से पार॥
दत्तात्रेय चालीसा का महत्व
दत्तात्रेय चालीसा का पाठ पितृ दोष, काल सर्प दोष और संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है। नियमित पाठ से ज्ञान, मुक्ति और भक्ति की प्राप्ति होती है।
दत्तात्रेय चालीसा का पाठ कैसे करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान दत्तात्रेय की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। गुरुवार के दिन पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
लाभ
पितृ दोष से मुक्ति।
काल सर्प दोष का निवारण।
ज्ञान और मुक्ति की प्राप्ति।
संकटों से मुक्ति।