वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन ऋतुराज वसंत का आगमन माना जाता है और माँ सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। विद्या, संगीत और कला की देवी सरस्वती की यह मुख्य पूजा-तिथि है। इस लेख में वसंत पंचमी सरस्वती पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र और नियम दिए गए हैं।

सामान्य सरस्वती पूजा सरस्वती पूजा विधि और विद्यारंभ विद्यारंभ पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।

वसंत पंचमी का महत्व

वसंत पंचमी को वसंत ऋतु का आरंभ और ज्ञान का पर्व माना गया है। इस दिन माँ सरस्वती की पूजा से विद्या-बुद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है। पीला रंग वसंत का प्रतीक है — इस दिन पीले वस्त्र धारण करने और पीली मिठाई-प्रसाद का प्रचलन है। कई स्थानों पर बालकों का अक्षराभ्यास (विद्यारंभ) भी इसी दिन किया जाता है।

वसंत पंचमी पूजा कब करें?

वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है — यह तिथि सामान्यतः जनवरी-फरवरी में आती है। पूजा प्रातः-काल की जाती है; सटीक पूजा-मुहूर्त पंचांग देखें।

वसंत पंचमी पूजा की सामग्री

  • सरस्वती की मूर्ति/चित्र,
  • पीला वस्त्र, पीले पुष्प, अक्षत, रोली, कुमकुम, चंदन,
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — दूध, मिश्री, मिठाई, फल, नारियल,
  • पुस्तकें, कलम, वीणा/वाद्य (जहाँ उपलब्ध), आसन।

वसंत पंचमी सरस्वती पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प करें:

मम उपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीसरस्वतीप्रीत्यर्थं
वसन्तपञ्चमीपूजनं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण एवं सरस्वती ध्यान

ॐ गं गणपतये नमः।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

चरण 3 — सरस्वती का पूजन

माँ सरस्वती का पूजन करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य। प्रचलित प्रारूप:

ॐ सरस्वत्यै नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — पुस्तक-कलम का पूजन

वसंत पंचमी पर पुस्तकें, कलम और अध्ययन-सामग्री का पूजन करने की परंपरा है — विद्या के प्रति सम्मान का भाव।

चरण 5 — सरस्वती मंत्र जप

ॐ सरस्वत्यै नमः।
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि।
तन्नः सरस्वती प्रचोदयात्॥

चरण 6 — चालीसा पाठ एवं आरती

सरस्वती चालीसा का पाठ करें और आरती — जय सरस्वती माता — करें। अंत में क्षमा-प्रार्थना:

आवाहनं न जानामि न जानामि तथार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥

वसंत पंचमी के नियम

  • वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र और पीले प्रसाद का प्रचलन है।
  • इस दिन विद्यार्थियों के लिए नया अध्ययन/अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है।
  • कुछ क्षेत्रों में इस दिन गणेश और सरस्वती दोनों का पूजन होता है।
  • वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की मूर्ति/चित्र की स्थापना कई स्थानों पर की जाती है।

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