नवरात्रि माँ दुर्गा की आराधना का नौ दिनों का महापर्व है। वर्ष में दो मुख्य नवरात्रि हैं — चैत्र (वासंतिक) नवरात्रि और आश्विन (शारदीय) नवरात्रि। नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — की अलग-अलग पूजा होती है। इस लेख में नवरात्रि पूजा की संपूर्ण विधि, घटस्थापना, नौ देवियों का क्रम, अष्टमी-नवमी पूजन और नियम दिए गए हैं।

सामान्य दुर्गा पूजा की विधि दुर्गा पूजा विधि पृष्ठ पर देखें। घटस्थापना, अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन की अलग-अलग विधियाँ नीचे दिए गए अलग-अलग पृष्ठों पर हैं।

नवरात्रि का महत्व

नवरात्रि में माँ दुर्गा को नौ रूपों में पूजा जाता है। परंपरा में इन नौ दिनों को शक्ति-उपासना, उपवास, जप और भक्ति का काल माना गया है। चैत्र नवरात्रि के अंत में राम नवमी और शारदीय नवरात्रि के अंत में विजयादशमी (दशहरा) आती है।

नवरात्रि की नौ देवियाँ (पारंपरिक क्रम)

दिनदेवी
प्रतिपदाशैलपुत्री
द्वितीयाब्रह्मचारिणी
तृतीयाचंद्रघंटा
चतुर्थीकूष्मांडा
पंचमीस्कंदमाता
षष्ठीकात्यायनी
सप्तमीकालरात्रि
अष्टमीमहागौरी
नवमीसिद्धिदात्री

यह क्रम सर्वमान्य है, यद्यपि कुछ क्षेत्रीय ग्रंथों में नामों का क्रम थोड़ा भिन्न मिल सकता है। नौ देवियों की अलग-अलग दैनिक पूजा-विधियाँ इस साइट पर क्रमशः child पृष्ठों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

नवरात्रि पूजा की तैयारी

  • नवरात्रि शुरू होने से पहले घर की सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था करें।
  • घटस्थापना की सामग्री — मिट्टी का कलश, जौ, मिट्टी की वेदी, आम के पत्ते, नारियल, मौली — तैयार रखें।
  • माँ दुर्गा की मूर्ति/चित्र, लाल वस्त्र, रोली-कुमकुम, पुष्प, धूप-दीप।

नवरात्रि पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — प्रथम दिन घटस्थापना

नवरात्रि के पहले दिन (शुक्ल प्रतिपदा) घटस्थापना/कलश स्थापना की जाती है — संपूर्ण विधि घटस्थापना पूजा विधि पृष्ठ पर देखें। इस दिन जौ बोए जाते हैं (जवारा) और नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाई जाती है।

चरण 2 — नौ दिनों का नियमित पूजा-क्रम

  • प्रतिदिन प्रातः स्नान-संकल्प, कलश/मूर्ति का पूजन और देवी-उपचार।
  • नौ दिनों में से प्रत्येक दिन उस दिन की देवी के नाम का ध्यान और पूजन (उपर्युक्त क्रम)।
  • प्रतिदिन दुर्गा चालीसा पाठ और दुर्गा मंत्र जप।
  • संध्या में आरती — जय अम्बे गौरी
ॐ दुर्गायै नमः।
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि।
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥

चरण 3 — सप्तमी-अष्टमी (महाअष्टमी)

अष्टमी के दिन महागौरी पूजा और कुछ स्थानों पर संधि-काल पूजा होती है — दुर्गा अष्टमी पूजा विधि देखें।

चरण 4 — नवमी (महानवमी)

नवमी के दिन सिद्धिदात्री पूजा, हवन और कन्या पूजन का प्रचलन है — महानवमी पूजा विधि और कन्या पूजन विधि देखें।

चरण 5 — दशमी (विजयादशमी)

दसवें दिन नवरात्रि की समाप्ति पर कलश-विसर्जन होता है। शारदीय नवरात्रि की दशमी विजयादशमी (दशहरा) होती है।

नवरात्रि के नियम

  • व्रत स्वास्थ्य के अनुसार रखें — पूर्ण उपवास या फलाहार, जैसा उचित लगे।
  • बीमार, वृद्ध, गर्भवती और बच्चों के लिए व्रत अनिवार्य नहीं।
  • नवरात्रि में संयम, शांति और सात्विक भोजन का विशेष ध्यान रखें।
  • नवरात्रि पूजन में कलश-पूजा और अखंड ज्योत का विशेष महत्व है।
  • क्षेत्रीय पद्धति (बंगाली सार्वजनिक पूजा, गुजराती गरबा आदि) के अनुसार प्रचलन भिन्न है।

नवरात्रि से जुड़ी विशेष पूजाएँ

संबंधित पृष्ठ

तिथि
चैत्र/आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक
शुभ मुहूर्त
स्थानीय पंचांगानुसार देखें
पूजा समय
प्रतिपदा से नवमी तक नित्य पूजन