जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म-उत्सव का पर्व है, जो श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में कृष्ण की विशेष पूजा, व्रत, रात्रि-जागरण और भजन-संकीर्तन का प्रचलन है। इस लेख में जन्माष्टमी की पूजा विधि, व्रत, बाल गोपाल पूजन, जागरण और पारण का संपूर्ण क्रम दिया गया है।
सामान्य नित्य कृष्ण पूजा की विधि कृष्ण पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।
जन्माष्टमी का महत्व
परंपरा में श्रावण कृष्ण अष्टमी को भगवान कृष्ण का जन्मदिवस माना जाता है। मंदिरों में मध्यरात्रि (जन्म-समय) पर विशेष उत्सव और झाँकी होती है। जन्माष्टमी का मूल भाव अधर्म पर धर्म की विजय और भक्ति की सरलता माना गया है। यह दिन व्रत, पूजा और नाम-संकीर्तन के लिए विशेष माना गया है।
जन्माष्टमी कब मनाई जाती है?
जन्माष्टमी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है; अनेक परंपराओं में इसके साथ रोहिणी नक्षत्र का भी विचार किया जाता है। यह तिथि सामान्यतः अगस्त-सितंबर में आती है। तिथि और मुहूर्त सदैव स्थानीय पंचांग से देखें।
जन्माष्टमी की तैयारी
- एक दिन पहले घर की सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था करें।
- बाल गोपाल/कृष्ण की मूर्ति या झूला-झाँकी की व्यवस्था करें (जिन घरों में प्रचलन हो)।
- सामग्री — पंचामृत, पुष्प, अक्षत, तुलसी, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (दही, मक्खन, मिश्री, केला, पंचमेवा), आसन, घंटी।
- कृष्ण चालीसा और भजन-पुस्तक रखें।
जन्माष्टमी पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — प्रातः स्नान एवं संकल्प
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत-पूजन का संकल्प करें। संकल्प में 'अमुक' स्थानों पर अपनी जानकारी भरें:
जन्माष्टमीव्रतपूजां करिष्ये।
चरण 2 — गणेश स्मरण एवं कृष्ण ध्यान
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
चरण 3 — कृष्ण/बाल गोपाल पूजन
कृष्ण की मूर्ति/चित्र का पूजन करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान (जल/पंचामृत), वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा। प्रचलित प्रारूप:
नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।
दही, मक्खन और मिश्री का नैवेद्य जन्माष्टमी में विशेष प्रचलित है।
चरण 4 — मंत्र जप
दिन भर प्रचलित कृष्ण मंत्रों का जप करें:
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥
चरण 5 — चालीसा पाठ एवं संकीर्तन
कृष्ण चालीसा का पाठ करें और दिन भर कृष्ण-भजन/नाम-संकीर्तन करें। कई घरों में दिन में ही झूला-झाँकी सजाकर बाल गोपाल को झुलाने का प्रचलन है।
चरण 6 — रात्रि जागरण एवं मध्यरात्रि पूजन
कई परंपराओं में जन्माष्टमी की रात्रि जागरण करते हुए मध्यरात्रि (जन्म-समय माने जाने वाला क्षण) पर कृष्ण की पुनः पूजा, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। प्रचलित आरती — आरती कुंजबिहारी की।
चरण 7 — पारण
जन्माष्टमी का व्रत नवमी के दिन प्रातः पारण द्वारा पूर्ण होता है। पारण का सटीक समय पंचांग देखें — कई परंपराओं में रोहिणी नक्षत्र के अंत तक पारण करने की मान्यता है।
जन्माष्टमी के नियम
- व्रत स्वास्थ्य के अनुसार रखें — पूर्ण उपवास, फलाहार या एक समय का भोजन, जैसा उचित लगे।
- बीमार, वृद्ध, गर्भवती और बच्चों के लिए व्रत अनिवार्य नहीं; अपनी क्षमता के अनुसार करें।
- जन्माष्टमी के दिन दान-दक्षिणा और प्रसाद वितरण का भी प्रचलन है।
- मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारों से बचने हेतु पहले से योजना बनाएँ।
संबंधित पृष्ठ
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- आरती कुंजबिहारी की