दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती श्री दत्तात्रेय भगवान की प्रचलित आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ दिया गया है।

दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती का महत्व

भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अवतार माना जाता है। दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) और गुरुवार के दिन इस आरती का विशेष प्रचलन है।

आरती

दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती, ब्रह्मविष्णु शिव रूप की आरती ॥ ॥ दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती..॥
तीनों मुख की छवि सुहावनि, जटा में गंगा बहावनि ।त्रिशूल-डमरू-कमण्डल कर में, भक्तन को सुख दावनि ॥ ॥ दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती..॥
वाहन स्वामी तुम्हारा, श्वान सुहावनि ।गुरु वशिष्ठ के शिष्य, जगत के उद्धारक ॥ ॥ दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती..॥
गंगा तट पर ध्यान लगाते, अश्वत्थामा संग ध्याते ।जन्म-जन्म के बन्धन काटन, चरण तुम्हारे आते ॥ ॥ दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती..॥
सेवक जन की लाज रखो, संकट हरो सारे ।आरती जो नर गावे, कभी न दुख भारे ॥ ॥ दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती..॥
दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती, ब्रह्मविष्णु शिव रूप की आरती ॥ ॥ दत्तात्रेय प्रभु जी की आरती..॥
आरती का समय
प्रतिदिन, विशेषतः गुरुवार और दत्त जयंती पर

आरती विधि

श्री दत्तात्रेय की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें।

संदर्भ: भक्त वत्सल — bhaktvatsal.com

लाभ

मनोकामना पूर्ति।
कष्टों से मुक्ति।
दत्त कृपा की प्राप्ति।