सावन (श्रावण) मास को हिंदू परंपरा में भगवान शिव का विशेष मास माना जाता है। इस पूरे मास में शिव की पूजा का विशेष प्रचलन है, पर सावन के सोमवार का सबसे अधिक महत्व होता है। सावन के चारों सोमवारों को हर सोमवार की तरह ही व्रत और शिव पूजा की जाती है, पर जलाभिषेक और मंदिर दर्शन का प्रचलन विशेष रूप से बढ़ जाता है।

इस लेख में सावन सोमवार की पूजा विधि, व्रत के नियम, जलाभिषेक और सावधानियाँ क्रमबद्ध रूप से दी गई हैं। सामान्य सोमवार व्रत की विधि सोमवार शिव पूजा विधि और सामान्य शिव पूजा की संपूर्ण विधि शिव पूजा विधि पृष्ठ पर देखें।

सावन मास का महत्व

पौराणिक परंपरा में श्रावण मास शिव का प्रिय मास माना गया है। इस मास में उत्तर भारत में प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में जलाभिषेक का व्यापक प्रचलन होता है। कई परंपराओं में सावन के सोमवार व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है। ये आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं — कोई गारंटी या तथ्यात्मक दावा नहीं।

सावन सोमवार कौन-कौन से होते हैं?

श्रावण मास में सामान्यतः चार सोमवार आते हैं (कभी-कभी पाँच)। हर सोमवार पर उपवास और शिव पूजन का प्रचलन है। कुछ परंपराओं में सावन के चारों सोमवारों का अलग-अलग नाम भी लिया जाता है। श्रावण मास की तिथियों के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

सावन सोमवार व्रत के नियम

  • प्रातः स्नान कर संकल्प करें।
  • दिन भर उपवास/फलाहार — पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार।
  • शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक करने का विशेष प्रचलन है।
  • सात्विक आचरण और भोजन की परंपरा है।
  • व्रत का पारण अगले दिन प्रातः होता है।

सावन सोमवार पूजा की सामग्री

  • शुद्ध जल/गंगाजल (अभिषेक हेतु), पंचामृत सामग्री,
  • चंदन, भस्म, अक्षत,
  • बेलपत्र, श्वेत पुष्प,
  • धूप, घी का दीपक, कपूर,
  • नैवेद्य (खीर, मिश्री, फल),
  • आसन, पंचपात्र, घंटी।

सावन सोमवार पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — संकल्प

स्नान-शुद्धि के बाद आचमन और संकल्प करें। संकल्प का सामान्य प्रचलित प्रारूप (अमुक स्थान अपनी जानकारी से भरें) शिव पूजा विधि पृष्ठ पर दिया गया है।

चरण 2 — गणेश स्मरण एवं शिव ध्यान

ॐ गं गणपतये नमः।

प्रचलित शिव ध्यान श्लोक:

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं,
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं,
विश्वाद्यं विश्वबीजं निधिमखिलफलं ध्यायन्नमस्ते॥

चरण 3 — जलाभिषेक

सावन सोमवार की मुख्य विशेषता जलाभिषेक है। शिवलिंग पर जल या गंगाजल से अभिषेक करें, ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए। कुछ परंपराओं में पंचामृत अभिषेक भी होता है। घर में जलाभिषेक करते समय जल को सोमसूत्र से बह जाने दें और शिवलिंग को सूखा न छोड़ें।

मंदिरों में जलाभिषेक के लिए जाते समय दूध या गंगाजल ले जाने का प्रचलन है। भीड़-भाड़ के समय मंदिर के नियमों का ध्यान रखें।

चरण 4 — चंदन, बेलपत्र, पुष्प एवं उपचार

प्रचलित अर्पण-मंत्र:

ॐ शिवाय नमः चन्दनं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः बिल्वपत्रं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः पुष्पं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः नैवेद्यं समर्पयामि।

चरण 5 — जप

ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जप सावन सोमवार में विशेष प्रचलित है। रुद्राक्ष की माला से एक या अधिक माला जपें।

चरण 6 — आरती, पुष्पांजलि एवं पारण

पूजा के अंत में शिव आरती (ॐ जय शिव ओंकारा) करें, पुष्पांजलि अर्पित करें और क्षमा प्रार्थना करें। व्रत का पारण अगले दिन प्रातः होता है।

कांवड़ यात्रा

सावन मास में उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में कांवड़ यात्रा का प्रचलन है — श्रद्धालु गंगा आदि से जल भरकर पैदल शिव मंदिरों तक ले जाते हैं और वहाँ अभिषेक करते हैं। यह क्षेत्रीय प्रचलन है; इसमें शामिल होते समय स्थानीय नियमों, रूट की जानकारी और अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखें।

सावन सोमवार के प्रमुख मंत्र

  • पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय।
  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ (ऋग्वेद 7.59.12)
  • शिव गायत्री: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ (पाठ में क्षेत्रीय अंतर मिल सकता है)

नियम और सावधानियाँ

  • उपवास रखने से पहले स्वास्थ्य का ध्यान रखें; गर्मी/बारिश के मौसम में पानी की कमी से बचें।
  • मंदिर जाकर अभिषेक करते समय कतार और मंदिर के नियमों का पालन करें।
  • अभिषेक के बाद जल की व्यवस्था मंदिर के अनुसार ही करें।
  • कांवड़ यात्रा लंबी हो तो समूह में और सुविधा की जानकारी के साथ ही जाएँ।

क्षेत्रीय एवं परंपरागत अंतर

उत्तर भारत में सावन सोमवार पर जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा का प्रचलन सबसे अधिक है; महाराष्ट्र में श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार त्र्यंबकेश्वर जैसे मंदिरों में विशेष पूजन होता है; दक्षिण भारत में श्रावण मास का विशेष शिव-प्रचलन कम है पर सोमवार पूजन होता है। किसी एक पद्धति को सार्वभौमिक 'एकमात्र सही तरीका' नहीं माना जा सकता — पारिवारिक परंपरा का अनुसरण करें।

सावन सोमवार से जुड़े पृष्ठ

व्रत तिथि
श्रावण मास के सोमवार