संकटनाशन गणेश स्तोत्र — विघ्न हरण का पाठ
कथा है कि जब देवताओं ने भी पर्वतराज हिमालय तक जाकर शिवजी से पुत्र की याचना की, तो न जाने किस काल में यह बात प्रचलित हुई कि गणेश जी ही प्रथम पूज्य हैं। विघ्नहर्ता के रूप में उनका स्वरूप ही ऐसा है — जो हर बाधा को दूर कर मार्ग प्रशस्त करते हैं। गणपति को सभी देवों से पहले पूजा जाता है, क्योंकि बिना उनके आशीर्वाद के कोई भी कार्य निर्विघ्न पूर्ण नहीं होता, यही मान्यता हमारे घरों में पीढ़ियों से चली आ रही है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र
संकटनाशन का अर्थ है — संकटों का नाश करने वाला। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि उनकी उपासना से माना जाता है कि जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में गणेश जी की वंदना करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह स्तोत्र उसी परंपरा का सरल और श्रद्धापूर्ण रूप है, जिसे भक्त अपने नित्य के संकल्प में शामिल करता है।
गणेश वंदना श्लोक
इस स्तोत्र का केंद्रीय श्लोक यही है —
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
इसका अर्थ है — जिनकी सूंड वक्र (मुड़ी हुई) है, जिनका शरीर विशाल है, जिनका तेज करोड़ों सूर्यों के समान है, हे देव, मेरे सभी कार्यों को सदा निर्विघ्न करें। अर्थात यह श्लोक गणेश जी के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए उनसे प्रार्थना करता है कि हर कार्य बाधा रहित हो।
कब पढ़ें
बुधवार का दिन गणेश जी का माना जाता है, इसलिए इस दिन इस स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी कहा जाता है। किसी नए कार्य, परीक्षा, यात्रा या कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले इस वंदना श्लोक का पाठ करने की परंपरा बताई गई है। गणेश चतुर्थी के दिन तो इस स्तोत्र का पाठ और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन लोगों को निरंतर रुकावटें और संकट आते हों, वे नियमित रूप से इसे पढ़ सकते हैं।
विधि
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। गणेश जी के समक्ष या मन में उनका ध्यान करके श्लोक का उच्चारण करें। भक्ति के साथ इस स्तोत्र को श्रद्धा से पढ़ें। परंपरा में लाल गुड़ या दूर्वा (दूब) अर्पण करने का विधान है — दूर्वा गणेश जी को अति प्रिय मानी जाती है। यदि घर में मूर्ति न हो, तो दीपक के समक्ष भी पाठ किया जा सकता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पूर्ण पाठ
लाभ
मान्यता है कि जो व्यक्ति विधिपूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, मन की शंका और भय शांत होते हैं, और जीवन में स्थिरता आती है। किसी कार्य में बार-बार विफलता मिलने पर भी श्रद्धा से पाठ करने का विश्वास बताया गया है।
गणेश उपासना को और समृद्ध बनाने के लिए गणेश चालीसा का पाठ करें। बुधवार के उपाय के लिए बुधवार व्रत पूजा विधि देखें। जीवन में संकट बढ़ते हों तो मंगल चालीसा का पाठ भी प्रचलित माना गया है।
ऊपर बताए गए लाभ धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।