दारिद्र्यदहन स्तोत्र — दरिद्रता नाश का पाठ

जिस प्रकार अग्नि सूखी लकड़ी को भस्म कर देती है, उसी प्रकार दारिद्र्यदहन स्तोत्र के पाठ से माना जाता है कि दरिद्रता की आग शांत होती है और घर में ऐश्वर्य का आलोक फैलता है। यह स्तोत्र भगवान शिव से जुड़ा हुआ है, जिन्हें काशी का स्वामी, संकट हरने वाला और कृपा का सागर माना गया है।

स्तोत्र का स्वरूप

इस स्तोत्र के नाम का अर्थ ही है — दरिद्रता को जलाने वाला। 'दहन' शब्द का अर्थ है जलाना। परंपरा के अनुसार, यह स्तोत्र भगवान शिव की उस शक्ति की प्रार्थना करता है जो अभाव, कर्ज और चिंता के भार को हर लेती है। यह कोई लंबा अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सरल और श्रद्धापूर्ण स्तुति है, जिसे भक्त श्रद्धा के साथ पढ़ता है।

दरिद्रता निवारण की मान्यता

शास्त्रों में भगवान शिव को 'दारिद्र्यदहन' नाम से भी पुकारा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति गरीबी, कर्ज या धन-संबंधी कष्टों से परेशान रहता है, वह इस स्तोत्र का नियमित पाठ करे तो उसकी चिंताएं कम होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में यह स्तोत्र श्रद्धा से पढ़ा जाता है, वहां किसी न किसी रूप में शांति और समृद्धि का प्रवेश होता है। ध्यान रखें, यह मान्यता श्रद्धा और परंपरा पर आधारित है।

पाठ का शुभ समय

पाठ के लिए सोमवार का दिन विशेष माना जाता है, क्योंकि सोमवार भगवान शिव का दिन है। महाशिवरात्रि पर इस स्तोत्र के पाठ का और भी अधिक महत्व बताया जाता है। प्रातः काल स्नान करने के बाद का समय सबसे उपयुक्त माना गया है। यदि प्रातः संभव न हो, तो संध्या के समय भी पाठ किया जा सकता है।

शिव ध्यान श्लोक

पाठ के पहले भगवान शिव का ध्यान करने के लिए यह प्रसिद्ध श्लोक पढ़ा जाता है —

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

इस श्लोक का सरल अर्थ यह है कि जो कर्पूर (कपूर) के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, समस्त संसार के सार हैं, जिनके गले में सर्पराज की माला शोभा पाती है और जो सदा भक्तों के हृदय-कमल में निवास करते हैं, उन भगवान शिव को भवानी के साथ हम नमन करते हैं। यानी यह श्लोक शिव जी के सौम्य, करुणामय और सृष्टि के आधार स्वरूप का ध्यान कराता है।

नियम और विधि

पाठ करने का नियम सरल है। प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाकर, आसन पर बैठकर शिव ध्यान श्लोक पढ़ें और फिर स्तोत्र का पाठ करें। पाठ के समय मन शिव की कृपा और अपने कष्टों के निवारण की भावना पर केंद्रित रहे। संभव हो तो पाठ के बाद किसी जरूरतमंद को भोजन या दान करने की परंपरा भी बताई गई है।

यह स्तोत्र शिव-उपासना की वह सरल धारा है, जो विश्वास के साथ पढ़ी जाए तो मन को संबल देती है। साथ ही शिव चालीसा का पाठ और शिव तांडव स्तोत्र का श्रवण भी शिव-भक्तों के लिए श्रद्धा बढ़ाने वाला माना गया है। धन संबंधी कष्ट होने पर मंगल चालीसा का पाठ भी प्रचलित है।

दारिद्र्यदहन स्तोत्र का पूर्ण पाठ

॥ दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् ॥
विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय । कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ १ ॥
गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय कालांतकाय भुजगाधिप कंकणाय । गंगाधराय गजराज विमर्धनाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ २ ॥
भक्तप्रियाय भवरोग भयापहाय उग्राय दुःख भवसागर तारणाय । ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ ३ ॥
चर्मांबराय शवभस्म विलेपनाय फालेक्षणाय मणिकुंडल मंडिताय । मंजीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ ४ ॥
पंचाननाय फणिराज विभूषणाय हेमांकुशाय भुवनत्रय मंडिताय । आनंद भूमि वरदाय तमोपयाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ ५ ॥
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय कालांतकाय कमलासन पूजिताय । नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ ६ ॥
रामप्रियाय रघुनाथ वरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णव तारणाय । पुण्याय पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ ७ ॥
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीताप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय । मातंगचर्म वसनाय महेश्वराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ ८ ॥
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोग निवारणम् । सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादि वर्धनम् । त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्ग मवाप्नुयात् ॥ ९ ॥
॥ इति श्री वसिष्ठ विरचितं दारिद्र्यदहन शिवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

ऊपर बताए गए लाभ धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।