जय श्री राम ॥ सत्यं वद । धर्मं चर ॥ हमें फॉलो करें:

मणिपुर शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Manipur Shakti Peeth — दक्षिण गण्ड से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

मणिक्यम्बा शक्ति पीठ आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में द्राक्षारामम में स्थित एक प्राचीन शक्ति पीठ है। यहाँ सती का दायाँ गाल गिरा था। यह पीठ मणिक्यम्बा देवी और वीरुपुर्ष भैरव के लिए विख्यात है।

परिचय

मणिक्यम्बा शक्ति पीठ आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में प्रसिद्ध तीर्थस्थल द्राक्षारामम में स्थित है। यह पीठ भारत के पचासी शक्ति पीठों में सत्ताईसवाँ स्थान रखता है। पिठानिर्णय ग्रंथ के अनुसार, यहाँ सती का दायाँ गाल गिरा था। यहाँ की देवी मणिक्यम्बा — मणि का अर्थ बहुमूल्य रत्न है — के नाम से विख्यात हैं। इस स्थान को द्राक्षारामम के नाम से भी जाना जाता है।

पौराणिक कथा

पिठानिर्णय और शिवपुराण के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सती के शरीर के खण्ड किए, तब उनके दाएँ गाल का खण्ड इस पवित्र भूमि पर गिरा। इस स्थान पर एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और देवी मणिक्यम्बा का स्वरूप स्थापित हुआ। मणिक्यम्बा शब्द मणि — रत्न — और अम्बा — माँ — से मिलकर बना है, जो इस देवी की दिव्यता और महत्व को दर्शाता है।

द्राक्षारामम की एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि इस स्थान पर एक समय द्राक्षा — अंगूर — के वृक्ष स्वयं प्रकट हुए थे, जिसके कारण इसे द्राक्षारामम कहा जाता है। यहाँ की भूमि अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है।

भौगोलिक स्थिति

मणिक्यम्बा मंदिर आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में द्राक्षारामम में स्थित है। यह स्थान काकीनाडा से लगभग तीस किलोमीटर और राजामंड्री से लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर है। गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर गोदावरी डेल्टा के उपजाऊ क्षेत्र में बना हुआ है। इस क्षेत्र की जलवायु उष्णकटिबंधीय है।

ऐतिहासिक महत्व

मणिक्यम्बा मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पिठानिर्णय ग्रंथ में इसका उल्लेख प्रमुख शक्ति पीठों में किया गया है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, मंदिर का निर्माण प्राचीन काल में हुआ। काकतीय और विजयनगर के शासकों ने इस मंदिर के संरक्षण में योगदान दिया। द्राक्षारामम हमेशा से एक प्रमुख धार्मिक केंद्र रहा है।

धार्मिक परंपरा एवं पूजा विधि

मणिक्यम्बा मंदिर में प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल पूजा-अर्चना होती है। देवी की मूर्ति अत्यंत सुंदर और अलंकृत है। यहाँ की विशेष पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ, कुमारी पूजन और देवी स्तुति शामिल हैं। भक्तगण देवी को सिंदूर, चुनरी, फूल और मिठाई अर्पित करते हैं।

वार्षिक उत्सव एवं मेले

नवरात्र सबसे प्रमुख उत्सव है। दशहरा, दीपावली और मकर संक्रांति भी यहाँ प्रमुख उत्सव हैं। वसंत पंचमी पर विशेष पूजा होती है।

यात्रा मार्गदर्शन

निकटतम रेलवे स्टेशन काकीनाडा है, जो तीस किलोमीटर दूर है। राजामंड्री से पचास किलोमीटर। निकटतम हवाई अड्डा राजामंड्री या विशाखापत्तनम है। यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च है।

निष्कर्ष

मणिक्यम्बा शक्ति पीठ द्राक्षारामम के प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक है। देवी मणिक्यम्बा और भैरव वीरुपुर्ष की पूजा इस स्थान को अत्यंत विशिष्ट बनाती है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

Body_part

दायाँ गाल

— Pithanirnaya
Devi

मणिक्यम्बा

— Pithanirnaya
Bhairava

वीरुपुर्ष

— Pithanirnaya
Location

द्राक्षारामम, पूर्वी गोदावरी, आंध्र प्रदेश

— Pithanirnaya
Pilgrimage_status

एक प्रमुख शक्ति पीठ

— Pithanirnaya
Sacred_name

द्राक्षारामम

— Local tradition

मतभेद और टिप्पणी

द्राक्षारामम को कुछ परंपराओं में अलग शक्ति पीठ माना जाता है। पिठानिर्णय में दायँ गाल का उल्लेख स्पष्ट है।

संपादकीय टिप्पणी:

यह सामग्री पिठानिर्णय ग्रंथ, शिवपुराण और आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर संकलित की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में द्राक्षारामम में, काकीनाडा से तीस किलोमीटर दूर।

पिठानिर्णय के अनुसार, सती का दायाँ गाल इस स्थान पर गिरा था।

द्राक्षा का अर्थ अंगूर है। कहा जाता है कि यहाँ स्वयं प्रकट अंगूर के वृक्ष हुए थे।

देवी मणिक्यम्बा, जिनका अर्थ मणि अर्थात् बहुमूल्य रत्न वाली माँ है।

यहाँ के भैरव वीरुपुर्ष के नाम से विख्यात हैं।

काकीनाडा रेलवे स्टेशन तीस किलोमीटर दूर है। राजामंड्री से पचास किलोमीटर।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • द्राक्षारामम: धार्मिक अध्ययन — डॉ. आर. सुब्रमण्यम , आंध्र विश्वविद्यालय
  • काकतीय वंश का इतिहास — डॉ. एन. लक्ष्मीनारायण , आंध्र प्रदेश अभिलेखागार
  • पिठानिर्णय ग्रंथ — अत्रि ऋषि , शैव परंपरा
  • शिवपुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य
  • आंध्र प्रदेश के तीर्थ स्थान — पी. वेंकट राव , आंध्र साहित्य प्रकाशन
  • आंध्र प्रदेश पर्यटन विभाग — आंध्र प्रदेश सरकार , आधिकारिक पोर्टल [link]
  • देवी भागवत पुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य