तिरुपति बालाजी को भगवान वेंकटेश्वर (श्री वेंकटेश) और विष्णु के अवतार माना जाता है। तिरुपति का श्री वेंकटेश्वर मंदिर विश्व का प्रसिद्ध धाम है। इस लेख में तिरुपति बालाजी पूजा की विधि, सामग्री, मंत्र, बालाजी दर्शन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

तिरुपति बालाजी का महत्व

परंपरा के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर सप्तगिरि (तिरुपति) पर्वत पर विराजमान माने जाते हैं। इन्हें कलियुग के प्रत्यक्ष देवता माना गया है। तिरुपति मंदिर में वेंकटेश्वर, लक्ष्मी और पद्मावती देवी की पूजा होती है। बालाजी नाम इनका प्रचलित नाम है। तिरुपति दर्शन को भारतीय परंपरा में विशेष माना गया है।

तिरुपति बालाजी पूजा कब करें?

  • शुक्रवार एवं शनिवार: बालाजी पूजन के लिए प्रचलित दिन।
  • वैकुंठ एकादशी: तिरुपति में विशेष दर्शन-पर्व।
  • प्रतिदिन: घर में बालाजी का नियमित पूजन किया जा सकता है।

तिरुपति बालाजी पूजा की सामग्री

  • रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन,
  • गंगाजल, पंचामृत,
  • तुलसी दल, पुष्प (पीले पुष्प श्रेष्ठ),
  • धूप, दीप, कपूर, घंटी,
  • नैवेद्य — खीर, मीठा, फल, नारियल।

तिरुपति बालाजी पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व दिशा की ओर मुख कर पूजा का संकल्प करें।

ॐ वेंकटेशाय नमः संकल्पमहं करिष्ये।

चरण 2 — गणेश स्मरण

ॐ गं गणपतये नमः।

चरण 3 — तिरुपति बालाजी का ध्यान-पूजन

तिरुपति बालाजी का ध्यान करते हुए उपचार-अर्पण करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्पांजलि। प्रचलित प्रारूप:

ॐ नमो वेंकटेशाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देवता को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। मंत्र में जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम [उपचार] के स्थान पर बोला जाता है — जैसे “… नमः पाद्यं समर्पयामि”, “… नमः गन्धं समर्पयामि”, “… नमः पुष्पं समर्पयामि” आदि।

चरण 4 — बालाजी मंत्र जाप

तिरुपति बालाजी का प्रचलित मंत्र जाप करें:

ॐ नमो वेंकटेशाय।

बालाजी चालीसा का पाठ बालाजी चालीसा लेख में देखें।

तिरुपति बालाजी पूजा के नियम

  • पूजा में श्रद्धा और नाम-स्मरण को विशेष महत्व दिया गया है।
  • तिरुपति दर्शन में केश-दान (मुंडन) की परंपरा प्रचलित है।
  • पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।
  • वैकुंठ एकादशी पर विशेष पूजन/दर्शन का महत्व है।