पार्थिव शिवलिंग स्वच्छ मिट्टी (मृत्तिका) और जल से बनाया गया शिवलिंग है। 'पार्थिव' का अर्थ 'पृथ्वी/मिट्टी से बना' होता है। महाशिवरात्रि पर और कुछ अन्य विशेष अवसरों पर पार्थिव शिवलिंग की पूजा की परंपरा है — कई घरों में यह पूजा एक, नौ या बारह दिनों तक की जाती है।
इस लेख में पार्थिव शिवलिंग बनाने, स्थापित करने, पूजने और विसर्जित करने की विधि क्रमबद्ध रूप से दी गई है। सामान्य शिव पूजा की विस्तृत विधि के लिए शिव पूजा विधि पृष्ठ देखें।
पार्थिव शिवलिंग पूजा का प्रचलन
पार्थिव शिवलिंग पूजा का प्रचलन विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर होता है। कुछ परंपराओं में महाशिवरात्रि के दिन एक या अधिक पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा की जाती है; कुछ परंपराओं में यह पूजा लगातार 9 या 12 दिन तक चलती है। परंपरा में पार्थिव शिवलिंग पूजन की महिमा का वर्णन मिलता है। ये आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं — कोई गारंटी या तथ्यात्मक दावा नहीं।
पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाएँ?
- स्वच्छ मिट्टी लें: साफ, बालू/कंकड़ रहित मिट्टी। कुछ परंपराओं में गंगाजल या स्वच्छ जल मिलाकर मिट्टी गूँथी जाती है।
- लिंग का आकार बनाएँ: गीली मिट्टी से हाथों से शिवलिंग का आकार बनाएँ — नीचे चौड़ा अंडाकार, ऊपर गोल शिखर। किसी विशेष आयाम का नियम हर परंपरा में अलग होता है; परिवार में प्रचलित आकार ही अपनाएँ।
- आधार (जलाधारी) बनाएँ: कई परंपराओं में मिट्टी की गोल आकृति (आधार) पर लिंग स्थापित किया जाता है।
- प्रतिदिन एक नया लिंग: जहाँ बहु-दिवसीय पूजा होती है, वहाँ प्रतिदिन नया पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन और अंत में विसर्जन की परंपरा है।
पार्थिव शिवलिंग पूजा की सामग्री
- स्वच्छ मिट्टी एवं गंगाजल/जल (लिंग बनाने हेतु),
- शुद्ध जल/गंगाजल, पंचामृत सामग्री,
- चंदन, भस्म, अक्षत,
- बेलपत्र, श्वेत पुष्प,
- धूप, घी का दीपक, कपूर,
- नैवेद्य (खीर, मिश्री, फल),
- आसन, पंचपात्र, घंटी।
पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1 — संकल्प
स्नान-शुद्धि के बाद आचमन और संकल्प करें। संकल्प का सामान्य प्रचलित प्रारूप (अमुक स्थान अपनी जानकारी से भरें) शिव पूजा विधि पृष्ठ पर दिया गया है।
चरण 2 — गणेश स्मरण एवं शिव ध्यान
प्रचलित शिव ध्यान श्लोक:
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं,
विश्वाद्यं विश्वबीजं निधिमखिलफलं ध्यायन्नमस्ते॥
चरण 3 — पार्थिव शिवलिंग का निर्माण एवं स्थापना
स्वच्छ मिट्टी और जल से हाथों से लिंग बनाएँ। कुछ परंपराओं में लिंग बनाते समय ॐ नमः शिवाय का जप किया जाता है। बने हुए लिंग को स्वच्छ आधार (पीतल/मिट्टी/ताँबे की जलाधारी या पात्र) पर स्थापित करें।
चरण 4 — जलाभिषेक
पार्थिव शिवलिंग पर जल या गंगाजल से अभिषेक करें; कुछ परंपराओं में पंचामृत अभिषेक भी होता है। अभिषेक के समय ॐ नमः शिवाय का जप करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग को सूखा न छोड़ें।
चरण 5 — चंदन, बेलपत्र, पुष्प एवं उपचार
प्रचलित अर्पण-मंत्र:
ॐ शिवाय नमः बिल्वपत्रं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः पुष्पं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ शिवाय नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
चरण 6 — जप
ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। रुद्राक्ष की माला से एक या अधिक माला जपें।
चरण 7 — आरती, पुष्पांजलि एवं क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में शिव आरती (ॐ जय शिव ओंकारा) करें, पुष्पांजलि अर्पित करें और क्षमा प्रार्थना करें।
चरण 8 — विसर्जन
पूजा समाप्ति पर पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन किया जाता है। प्रचलित तरीके:
- किसी बहते जल स्रोत (नदी/नाला) में विसर्जन, अथवा
- घर में स्वच्छ जल के पात्र में लिंग को जल में विसर्जित करके उस जल को किसी पौधे या जल स्रोत में डाल देना।
ध्यान दें: पार्थिव शिवलिंग को कचरे में नहीं फेंकना चाहिए — परंपरा में इसे जल में विसर्जित किया जाता है। बहु-दिवसीय पूजा में प्रतिदिन नया लिंग बनाकर पुराने का विसर्जन होता है।
पार्थिव शिवलिंग पूजा के नियम
- लिंग स्वच्छ मिट्टी से ही बनाएँ — गंदी या मिश्रित मिट्टी का उपयोग न करें।
- पूजा के दिन शुद्धता और सात्विक आचरण का ध्यान रखें।
- कई परंपराओं में पूजा के दिन उपवास/फलाहार रखा जाता है — पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार।
- पार्थिव शिवलिंग को उसी दिन विसर्जित करने का प्रचलन है; इसे स्थायी रूप से रखने की परंपरा नहीं है।
- अभिषेक का जल पौधे या जल स्रोत में विसर्जित करें।
पार्थिव शिवलिंग पूजा के प्रमुख मंत्र
- पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय।
- महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ (ऋग्वेद 7.59.12)
- शिव गायत्री: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ (पाठ में क्षेत्रीय अंतर मिल सकता है)
क्षेत्रीय एवं परंपरागत अंतर
पार्थिव शिवलिंग पूजा में क्षेत्रीय अंतर मिलते हैं — कहीं एक दिन की पूजा होती है, कहीं नौ या बारह दिन की; कुछ परंपराओं में प्रतिदिन एक-एक लिंग बनाकर पूजन होता है, कुछ में एक ही लिंग की बहु-दिवसीय पूजा होती है। महाशिवरात्रि पर इसका प्रचलन सबसे अधिक है। किसी एक पद्धति को सार्वभौमिक 'एकमात्र सही तरीका' नहीं माना जा सकता — पारिवारिक परंपरा का अनुसरण करें।
पार्थिव शिवलिंग पूजा से जुड़े पृष्ठ
- शिव पूजा विधि — सामान्य शिव पूजा की संपूर्ण विधि,
- शिवलिंग पूजा विधि — शिवलिंग की विशेष पूजा,
- महाशिवरात्रि — व्रत और पूजा विधि,
- रुद्राभिषेक विधि — रुद्री पाठ सहित विशेष अभिषेक,
- शिव चालीसा एवं शिव तांडव स्तोत्र।