भैरव बाबा को भगवान शिव का उग्र स्वरूप और रक्षक देवता माना गया है। इन्हें श्री भैरव या भैरवनाथ भी कहा जाता है। इस लेख में भैरव बाबा पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र, कालाष्टमी पूजन और नियम की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।

भैरव बाबा का महत्व

परंपरा के अनुसार भैरव भगवान शिव के अंश हैं और काशी के कोतवाल (रक्षक) माने जाते हैं। भैरव को भय से रक्षा करने वाला और भक्त की रक्षा करने वाला देवता माना गया है। संकट-निवारण और भूत-प्रेत आदि से रक्षा की मान्यता से जुड़े भैरव उपासक विशेष पूजन करते हैं। मान्यता है कि भैरव बाबा की पूजा से भय, कष्ट और संकट का नाश होता है तथा जीवन में सुरक्षा और आत्मबल बढ़ता है।

भैरव बाबा पूजा कब करें?

  • कालाष्टमी: प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरव बाबा का विशेष पूजन किया जाता है।
  • प्रतिपदा: कुछ परंपराओं में मास की प्रतिपदा को भी भैरव पूजन शुभ माना गया है।
  • मार्गशीर्ष कालाष्टमी: इस दिन भैरव अष्टमी/भैरव जयंती के रूप में विशेष उत्सव होता है।
  • रात्रि काल: भैरव उपासना का प्रिय समय रात्रि (विशेषकर 9 से 12 बजे) माना गया है।

भैरव बाबा पूजा की सामग्री

  • भैरव बाबा की प्रतिमा/चित्र, काला या लाल वस्त्र,
  • सरसों का तेल (दीपक हेतु), घी, कपूर, धूप,
  • काला चंदन, कुमकुम, अक्षत,
  • लाल/काले फूल, पीपल के पत्ते,
  • रुद्राक्ष की माला (जप हेतु),
  • उड़द, काला तिल, गुड़, नारियल, मद्य-वर्जित प्रसाद (मिठाई)।

भैरव बाबा पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 — स्नान एवं संकल्प

कालाष्टमी/प्रतिपदा की रात्रि या सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और भैरव प्रतिमा/चित्र को लाल कपड़े की चौकी पर स्थापित करें। संकल्प लें:

ॐ भैरवाय नमः पूजनं करिष्ये। ॐ गणं गणपतये नमः।

चरण 2 — तेल का दीपक एवं तिलक

सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। भैरव प्रतिमा पर काला चंदन या कुमकुम से तिलक लगाएँ और अक्षत-पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएँ। उपचार-अर्पण के समय मंत्र का जाप करें:

ॐ कालभैरवाय नमः [उपचार] समर्पयामि।

नोट: [उपचार] का अर्थ है पूजा में देव को चढ़ाई जाने वाली वस्तु या क्रिया (आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प-अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, पुष्पांजलि आदि)। जो उपचार उस समय अर्पित किया जा रहा है, उसका नाम मंत्र में [उपचार] के स्थान पर बोलें।

चरण 3 — बटुक भैरव मंत्र का जाप

रुद्राक्ष की माला लेकर पूजन के बाद बटुक भैरव मूल मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। यह मंत्र भैरव उपासना का प्रमुख मंत्र माना गया है:

ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

जप के लिए मान्यता है कि भैरव बाबा का भोग लगाए बिना जप आरंभ नहीं करना चाहिए। जप पूरा होने के बाद आरती करें।

चरण 4 — आरती एवं प्रसाद

जप के बाद भैरव बाबा की आरती करें और सरसों तेल के दीपक को घर के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोने में जलता छोड़ें। प्रसाद के रूप में मिठाई अर्पित करें। रात्रि में पूजा करने वाले भक्त कुछ देर जागकर भैरव चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

भैरव बाबा पूजा के नियम

  • कालाष्टमी के दिन उपवास रखें; संभव न हो तो फलाहार करें।
  • पूजा में मांस-मदिरा वर्जित है — प्रसाद सात्विक रखें।
  • भैरव बाबा का दीपक सरसों के तेल का जलाना शुभ माना गया है।
  • पूजा के दिन क्रोध, निंदा और झूठ से बचें — भैरव सत्य और रक्षा के देवता माने गए हैं।
  • भैरव जप रुद्राक्ष माला से ही करें; जप में एकाग्रता और श्रद्धा आवश्यक है।
  • निराश और भयभीत मन से पूजा न करें — भैरव उपासना से भय दूर होता है, यही भाव लेकर पूजन करें।