गायत्री मंत्र
गायत्री मंत्र को वेदों का सार कहा जाता है। इसे सर्वोत्तम और सर्वशक्तिमान मंत्र माना गया है। यह मंत्र सूर्य देवता की उपासना है और मन को शांति, बुद्धि को तीव्रता प्रदान करता है।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम्।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ: हम उस सविता देव (प्रकाशस्वरूप) की दिव्य आभा का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सही दिशा में प्रेरित करे।
जप संख्या
नियमित 108 बार, संकल्प हेतु 1008 बार।
जप विधि
प्रातः स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर सूर्य की ओर मुख करके जाप करें।
लाभ
बुद्धि और विवेक में वृद्धि।
मन की एकाग्रता।
आध्यात्मिक उन्नति।