तेजाजी चालीसा राजस्थान के लोक देवता वीर तेजाजी की महिमा का वर्णन करने वाला स्तोत्र है। इसका पाठ विष, भूत-प्रेत बाधा और संकटों से रक्षा के लिए किया जाता है।

तेजाजी चालीसा

श्री तेजा वीर तेज प्रकाशा ।सत्यवीर क्षत्रिय का जाया॥
ले अवतार खरनाल में आया ।शिव शंकर के तुम अवतारी ॥
तीन लोक में महिमा भारी ।रामकंवरी के लाल दुलारे ॥
ताहर जी के पुत्र प्यारे ।जात कुल का मान बढाया ॥
ले अवतार जगत में आया ।बासकराज वचन के दासा ॥
तेजा तेज है रवि समाना ।तुमको ध्यावे सारा ज़माना ॥
तेजा तुम सबके रखवारे ।जात पांत नहीं तेरे द्वारे ॥
धोली ध्वजा आकाश लहरावे ।चारों युग प्रकाश फैलावे ॥
सर पे साफा रूप सुहावन ।धोती कुर्ता है मन भावन ॥
हाथ सुहावन सोहे भाला ।मस्तक तेरे तेज निराला ॥
बल बुद्धि में तुम अति चातुर ।परहित करने को हो अति आतुर ॥
जो भी तेरी महिमा गावे ।पीड़ा, पाप, सब कट मिट जावे ॥
तांती बांधे विष उतर जावे ।भभूती लगावे घाव भर जावे ॥
जो कोई पुत्र हीन जन ध्यावे ।खाली गोद निश्चय ही भर जावे ॥
किसान कि ख़ुशी बढती जावे ।हल जोतकर तेजो गावे ॥
तेरे समाना कोई नहीं जग में ।भक्तों के बस जावो रग रग में ॥
सारे जग में महिमा तेरी ।विष उतरे हुवे नहीं देरी ॥
मन से जपता तेरा नामा ।उसके होते पूरण कामा ॥
जो कोई शरण में आवे ।सुख सम्पति अर आनन्द पावे ॥
अर्ज सुनो अब बाबा मेरी ।शरण में आया अब में तेरी ॥
तुम्ही हो मेरे सुख के दाता ।तुम ही पिता और माता ॥
तुम ही मेरे देव और दाता ।तेरे ही गुण में हरपल गाता ॥
पूजा पाठ कुछ रीत न जानूं ।तेजा वीर कि महिमा बखानूं ॥
तेरा नाम बड़ा सुखदाई ।तेरी महिमा जग में छाई ॥
भाभी ने तुमको बोले बोल ।तुमने बताये वचन अनमोल ॥
सकल बुद्धि मन कुमति निवारो ।क्षमा करो अपराध हमारो ॥
गौ वंश से प्रेम निराला ।हम सबका तू ही रखवाला ॥
दुश्मनों ने जब घात लगाया ।तुमने अपना बल दिखलाया ॥
हाथ हथेल्यां जीभ कुँवारी ।डसो बासक , बोले तपधारी ॥
गायें छुडावन आप सिधाये ।प्राण देकर वचन निभाये ॥
विजय पताका तेरा लहराये ।जय जय वीर तेजा कहलाये ॥
लाछा गुजारी तेरा गुण गावे ।जिनकी गायें आप छुडावे ॥
लीलण असवारी तेरी शान ।घोड़ी होकर दिया बलिदान ॥
राणी पेमल सती सत लेवे ।भक्तों को बाबा आशीष देवे ॥
भाई पर सती की पहली गाथा ।नमो: नमो: देवी बंगाल माता ॥
बलिदान सुरसुरा देव कहाये ।बासक देव ने वचन सुणाये ॥
जहर जानवर प्रेत नहीं आवे ।जो कोई तेजा चालीसा गावे ॥
लेय भभूती घर में आवे ।उस घर में कभी दुःख नआवे ॥
भादवा सुदी दशम कहिजे ।भोग लागे और मेला भरीजे ॥
खिराज सियाग आस अब तेरी ।दया दृष्टी में मत कर देरी ॥

तेजाजी चालीसा का महत्व

तेजाजी चालीसा का पाठ विष, भूत-प्रेत बाधा और संकटों से रक्षा के लिए किया जाता है। माना जाता है कि नियमित पाठ से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

तेजाजी चालीसा का पाठ कैसे करें

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर तेजाजी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) के दिन पाठ विशेष फलदायी माना गया है।

लाभ

विष बाधा से रक्षा।
भूत-प्रेत बाधा का निवारण।
संकटों से मुक्ति।
संतान सुख की प्राप्ति।