काल भैरव चालीसा श्री काल भैरव की महिमा का वर्णन करने वाला स्तोत्र है, जो भगवान शिव के सबसे रौद्र स्वरूप हैं। इसका पाठ नवग्रह दोष, भूत-प्रेत बाधा और संकटों से मुक्ति के लिए किया जाता है।
प्रारंभिक दोहा / मंगलाचरण
नाथ सकल संसार के, दुख हरहु भगवान॥
काल भैरव चालीसा
काल रूप तुम कराल सुजाना। दुष्ट दलन जग में विधि नाना॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। सभी भय खावे तुम्हरी नजर॥
रुद्र रूप धरि काल तुम आए। त्राहि त्राहि सब लोक चिल्लाए॥
डमरूधारी, गले में फंदा। बिना तुम्हारी कृपा न फंदा॥
सत्य असत्य का तुम हो ज्ञाता। त्रिलोक में तुम पालन दाता॥
रक्त पान की भूख तुम्हारी। दुष्ट दलन की रीति तुम्हारी॥
श्वान वाहन संग तुम आते। शमशान में तुम ध्यान लगाते॥
दीनबंधु, दयालु कृपानिधि। सदा सहायक हो भवसिन्धि॥
असुर निकंदन, जग के त्राता। जय जय जय कालिके भ्राता॥
महाकाल की कृपा तुम्हारी। जो भी शरण पड़े दुःख हारी॥
भैरव ध्यान करे जो कोई। संकट निकट न आवे कोई॥
जय हो बाबा भैरव नाथा। नवग्रह दोष मिटावें साता॥
जो कोई यह चालीसा गावे। सब संकट से मुक्ति पावे॥
समापन दोहा
सब कष्टों का नाश कर, भव से लगे पार॥
काल भैरव चालीसा का महत्व
काल भैरव चालीसा का पाठ नवग्रह दोष, भूत-प्रेत बाधा और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से राहत दिलाने वाला माना जाता है। नियमित पाठ से सभी संकट दूर होते हैं।
काल भैरव चालीसा का पाठ कैसे करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर श्री काल भैरव की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। अष्टमी के दिन पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
लाभ
नवग्रह दोष से मुक्ति।
भूत-प्रेत बाधा से रक्षा।
संकटों का नाश।
भय से मुक्ति।