चन्द्र चालीसा चन्द्र देव की महिमा का वर्णन करने वाला स्तोत्र है। चन्द्र को मन, मातृत्व और शीतलता का कारक माना जाता है। इसका पाठ चन्द्र दोष से राहत, मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।
प्रारंभिक दोहा / मंगलाचरण
चन्द्र चालीसा
श्वेत वरण तन शोभा भारी। शीतल किरण जगत हितकारी॥
सोम नाम से जग में जाने। औषधि के तुम स्वामी माने॥
क्षीरसिन्धु से प्रकट तुम भये। देवन के तुम प्रिय बन गये॥
श्वेत अश्व रथ पर तुम साजे। मृग सम चंचल मन में राजे॥
सत्ताईस नक्षत्र तुम्हारी। दक्ष सुता सब प्रिय नारी॥
रोहिणी प्रिय तुम्हें अति प्यारी। दक्ष श्राप से क्षय भय भारी॥
शिव की जटा बीच तुम साजे। भाल चन्द्र शिव शीश विराजे॥
मन को शान्ति तुम्हीं से आवे। चन्द्र दोष जो जन से जावे॥
सोमवार जो पूजन कीजे। मन इच्छित वरदान सो लीजे॥
श्वेत वस्त्र श्वेत फूल चढ़ावे। चावल खीर का भोग लगावे॥
जो जन तुमको शीश नवावे। मन की शान्ति सो जन पावे॥
चन्द्र कमजोर जो कुण्डल माहीं। ध्यान धरे तेहि कष्ट न नाहीं॥
मोती धारण जो जन कीजे। चन्द्र कृपा सो जन लीजे॥
मानसिक रोग सब दूर हो जावे। निद्रा सुख से जन सो पावे॥
श्रद्धा से जो ध्यान लगावे। सो नर शीतल मन हो जावे॥
पूनम को जो पूजन कीजे। चन्द्र दर्शन कर सुख सो लीजे॥
चन्द्रदेव की महिमा भारी। पूजत नर नारी सब प्यारी॥
जो यह पाठ करे चालीसा। पूरण आस करे जगदीशा॥
चन्द्रदेव की कृपा जो पावे। सो नर सकल मंगल पावे॥
समापन दोहा
चन्द्र चालीसा का महत्व
चन्द्र चालीसा का पाठ चन्द्र दोष से राहत और मानसिक शांति के लिए किया जाता है। इससे मन की शांति मिलती है, मानसिक रोग दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
चन्द्र चालीसा का पाठ कैसे करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर चन्द्र देव की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। सोमवार और पूर्णिमा के दिन पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
लाभ
चन्द्र दोष से राहत।
मानसिक शांति और निद्रा सुधार।
मनोकामना पूर्ति।
सुख-समृद्धि।