बुध चालीसा बुध ग्रह की महिमा का वर्णन करने वाला स्तोत्र है। बुध को विद्या, बुद्धि और वाणी का कारक माना जाता है। इसका पाठ बुद्धि की वृद्धि, रोग-दोष निवारण और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
प्रारंभिक दोहा / मंगलाचरण
करहुं कृपा मोहि जानि कायर अधम का।॥
करहुं कृपा कृपानिधि बुध सदा सहाय।॥
रोग दोष दुख हरो अनाथ के नाथ॥
बुध चालीसा
जटा मुकुट सिर शोभित भारी। त्रिपुण्ड चंदन रेखा प्यारी॥
गरल कनठ सर्प जग माला। नाग कंकन कर मंडित भाला॥
ब्रह्म रूप वर शुभ्र सरीरा। करत सदा जन कल्याण अधीरा॥
श्वेत कमल आसन मन भावा। संत करत सदा मंगल ध्यावा॥
कुंजल बिराजत छवि नयनी। अति मनोहर मंगल गुन खानी॥
काटत पातक पंक भरारा। बुध ग्रह दुष्ट नरक सँसारा॥
सुख सृखावत सब फल साता। रोग दोष संकट हरण विधाता॥
बुध की महिमा अपरंपारा। किया जानि मनुज दुख निवारा॥
लाख के वचन धरत दर साता। रोग हरण बुध दया विहाता॥
ग्रह अनिष्ट जो नर पर छाए। रोग दोष भय मिटै नहिं जाऐ॥
तिन्ह पर बुद्ध अनुग्रह होई। काटि दै सब संकट मोहे॥
जनम जनम के पातक भारी। काटि दै सब बुध मति तारी॥
सुर नर मुनि नित्य गुण गावे। यश गावत बुध सुख पावे॥
रोग दोष संकट सब हारी। धरहुं धीर बुध हरहु पाप भारी॥
नित नव मंगल करत सवारी। रोग दोष बुध हरहु भारी॥
अधम कायर मतिहीन हमारा। करहुं कृपा बुध हरो दुख सारा॥
सुख संपत्ति दै करहुं उपाई। जन मन रंजन मंगल लाई॥
बुध सुधी सील रूप सुहावा। संत ध्यावत मंगल भावा॥
विनय करौं बुध देव तुम्हारी। संकट हरो हे पातक भारी॥
अधम कायर सुबुद्धि सुधारा। करहुं कृपा हरो दुख सारा॥
महा संकट में तिन्हें उबारो। अधम कायर सुबुद्धि सुधारो॥
हरहुं पाप बुध महा विधाता। सुर नर मुनि सदा शुभ गाता॥
बुध की महिमा अपार पावे। अधम कायर सब संकट हरे॥
जयति जयति बुध देव सहाय। कृपा करहुं हरहुं सब भय॥
समापन दोहा
दुख दारिद्र्य मिटाओ भारी॥
यह चालीसा बुध ग्रह का पाठ।॥
करहुं कृपा बुध हरो सब कष्ट॥
बुध चालीसा का महत्व
बुध चालीसा का पाठ बुद्धि और विद्या की वृद्धि के लिए किया जाता है। इससे रोग-दोष, संकट और अशुभ ग्रह प्रभाव दूर होते हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
बुध चालीसा का पाठ कैसे करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर बुध देव की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। बुधवार के दिन पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
लाभ
बुद्धि और विद्या की वृद्धि।
रोग-दोष और संकट का निवारण।
अशुभ ग्रह प्रभाव से मुक्ति।
सुख-समृद्धि और मान-सम्मान।