भुवनेश्वरी चालीसा मां भुवनेश्वरी की महिमा का वर्णन करने वाला स्तोत्र है। मां भुवनेश्वरी को दस महाविद्याओं में एक और आदि शक्ति का रूप माना जाता है। इसका पाठ संकट निवारण, मनोकामना पूर्ति और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
प्रारंभिक दोहा / मंगलाचरण
त्रिभुवन जननी अम्बिके, काटहु भव भय फन्द॥
भुवनेश्वरी चालीसा
चन्द्रवदन पर शोभित टीका, मुख पर तेज अमित अमिका॥
भाल विशाल मुकुट छवि छाजै, कर में कमल सुशोभित राजै॥
तन पर सुन्दर पीत वसन माँ, राजहंस वाहन आसन माँ॥
तुम ही वैष्णवी, तुम ही रुद्राणी, तुम ही ब्रह्माणी महारानी॥
तुम ही आदिशक्ति जग-जननी, भक्त-जनों की हो दुःख-हरणी॥
तीन लोक का तुम्हीं रचैया, सबके प्राणों की तुम रखवैया॥
बीज मन्त्र है ह्रीं तुम्हारा, जपत है जो नर भव पारा॥
तुमने ही मधु-कैटभ मारे, तुमने ही महिषासुर संहारे॥
शुम्भ-निशुम्भ को तुमने पछाड़ा, रक्तबीज का रक्त निकारा॥
चौदह भुवन का तुम विस्तार, तुम ही हो सबका आधार॥
सकल सृष्टि तुम्हारी माया, तुम बिन कोई पार न पाया॥
तुम ही सूर्य-चन्द्र-नभ-तारे, तुम ही हो सबके रखवारे॥
अन्नपूर्णा बन अन्न देती हो, मात लक्ष्मी बन धन देती हो॥
महासरस्वती विद्या-दानी, विद्या-बुद्धि दो महारानी॥
तुमने ही रचना की सारी, यह सब है लीला तुम्हारी॥
ऋषि-मुनि तुमरा ध्यान लगावें, नारद-शारद शीश नवावें॥
योगी-गण सब योग साधते, तुम बिन सिद्धि कभी न पाते॥
जो भी तुम्हारी शरण में आया, तुमने उसका मान बढ़ाया॥
जिस पर हुई तुम्हारी दाया, उस पर दुःख की पड़ी न छाया॥
जो कोई माता तुम्हें पुकारे, तुम हो सदा उसी के सहारे॥
मैं हूँ माँ तुम्हारा ही बालक, तुम ही हो मेरी प्रतिपालक॥
मुझको शक्ति दो महारानी, जिससे करूँ तुम्हारा गुणगानी॥
मैं हूँ दीन, हीन, अज्ञानी, क्षमा करो मेरी हर नादानी॥
जो कोई पढ़े यह चालीसा, उस पर कृपा करें गौरीसा॥
प्रतिदिन इसे जो मन लाए पढ़ेगा, उसका सब दुःख-शोक मिटेगा॥
घर में सुख-समृद्धि आवेगी, मन में भक्ति-शक्ति जागेगी॥
बाल-बुद्धि विद्या बढ़ जावे, मान-यश जग में वह पावे॥
जो नारी इस पाठ को करती, सुख-सौभाग्य से गोद भरती॥
मैं हूँ शरण तुम्हारी माता, तुम बिन कोई नहीं त्राता॥
कृपा-दृष्टि मुझ पर भी करना, भव-बंधन मेरे सब हरना॥
हे त्रिभुवन-जननी! हे जगदम्बे! नमो नमो हे मातु अवलम्बे॥
समापन दोहा
भुवनेश्वरी चालीसा का महत्व
भुवनेश्वरी चालीसा का पाठ मनोकामना पूर्ति और संकट निवारण के लिए किया जाता है। नियमित पाठ से दुःख-शोक मिटते हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और विद्या-बुद्धि की वृद्धि होती है।
भुवनेश्वरी चालीसा का पाठ कैसे करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर मां भुवनेश्वरी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। नवरात्रि और शुक्रवार के दिन पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
लाभ
संकट और दुःख-शोक का निवारण।
सुख-समृद्धि की प्राप्ति।
विद्या-बुद्धि की वृद्धि।
मनोकामना पूर्ति।