जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो भगवान विश्वकर्मा की प्रचलित आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ दिया गया है।
जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो — विश्वकर्मा आरती का महत्व
भगवान विश्वकर्मा को देवों का शिल्पकार और विश्व की रचना का विधाता माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन इंजीनियर, कारीगर, मशीनें और औजारों की पूजा की जाती है, और इसी दिन इस आरती का विशेष गायन होता है।
आरती
जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो, विश्वकर्मा प्रभु जय हो।विश्वरचना के विधाता, त्रिभुवन के स्वामी॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
ऋषियों ने जिनको माना, विश्वकर्मा स्वामी ।विश्व की रचना रचते, देवों के कारीगर॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
स्वर्ण पुरी लंका बनाई, द्वारका सुहावनी ।शिव का त्रिशूल रचा, विष्णु का चक्र सुदर्शन॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
सभी यंत्रों के देवता, औजारों के स्वामी ।जिनकी कृपा से चलते, सब कारखाने॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
मशीन-कल के रचयिता, शिल्प-विद्या के ज्ञाता ।करते विनय हम सब, सफल करो हमारे कार्य॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो, विश्वकर्मा प्रभु जय हो।विश्वरचना के विधाता, त्रिभुवन के स्वामी॥
ऋषियों ने जिनको माना, विश्वकर्मा स्वामी ।विश्व की रचना रचते, देवों के कारीगर॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
स्वर्ण पुरी लंका बनाई, द्वारका सुहावनी ।शिव का त्रिशूल रचा, विष्णु का चक्र सुदर्शन॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
सभी यंत्रों के देवता, औजारों के स्वामी ।जिनकी कृपा से चलते, सब कारखाने॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
मशीन-कल के रचयिता, शिल्प-विद्या के ज्ञाता ।करते विनय हम सब, सफल करो हमारे कार्य॥ ॥ जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो..॥
जय विश्वकर्मा प्रभु जय हो, विश्वकर्मा प्रभु जय हो।विश्वरचना के विधाता, त्रिभुवन के स्वामी॥
आरती का समय
विश्वकर्मा पूजा के दिन (17 सितंबर), प्रतिदिन उद्योग-स्थलों पर
आरती विधि
विश्वकर्मा जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष औजार-मशीनों की पूजा कर दीपक जलाकर आरती करें।
संदर्भ: धर्मसार — dharmsaar.com
लाभ
कार्य में सफलता।
यंत्रों की सुरक्षा।
विश्वकर्मा जी की कृपा से उद्योग उन्नति।