आरती नृसिंह महावीर की भगवान नृसिंह (नरसिंह) की प्रचलित आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ दिया गया है।

आरती नृसिंह महावीर की का महत्व

इस आरती में भगवान नृसिंह के नर-सिंह रूप, हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने वाले और संतजनों के संकट दूर करने वाले स्वरूप का वर्णन है। नरसिंह चतुर्दशी पर विशेष महत्व है।

आरती

आरती नृसिंह महावीर की ।भक्तन की जो सुख-कारी भीर की ॥ ॥ आरती नृसिंह..॥
सिंह की कराल दाड़ नरतन में धारे ।सरल उर श्यामल अंग, हे भगवान, सुभग स्वरूप निहारे ॥ ॥ आरती नृसिंह..॥
महा-क्रोध-ज्वाला-समान नृसिंह की छवि ।हिरण्यकश्यप वध करने वाले ॥ ॥ आरती नृसिंह..॥
ध्रुव-अंगद-हनुमान-सम, भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने वाले ॥ ॥ आरती नृसिंह..॥
दुष्ट-दानव-विनाशक, संत जनों के रक्षक ।सब संकट दूर करने वाले ॥ ॥ आरती नृसिंह..॥
आरती नृसिंह महावीर की ।भक्तन की जो सुख-कारी भीर की ॥
आरती का समय
प्रतिदिन, विशेषतः नरसिंह चतुर्दशी पर

आरती विधि

भगवान नृसिंह की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें।

संदर्भ: हिंदू धर्म FAQ — hinduismfaq.com

लाभ

भय से मुक्ति।
संकटों का निवारण।
भक्ति में दृढ़ता।