ॐ जय लक्ष्मी माता माँ लक्ष्मी की सबसे प्रचलित आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ, महत्व और विधि दी गई है।

ॐ जय लक्ष्मी माता — आरती का महत्व

यह आरती माँ लक्ष्मी के क्षीरोदधि में जन्म, चतुर्दश रत्नों में प्रमुख होने, सूर्य-चन्द्रमा द्वारा ध्यान और ऋद्धि-सिद्धि-धन देने वाले स्वरूप का वर्णन करती है। दीपावली और शुक्रवार के दिन विशेष महत्व है।

आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निस दिन सेवत हर-विष्णु-धाता॥ ॐ जय…
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय…
तुम पाताल-निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता।जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता॥ ॐ जय…
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय…
जिस घर तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता।सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥ ॐ जय…
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।खान-पान का वैभव सब तुमसे आता॥ ॐ जय…
शुभ-गुण-मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता॥ ॐ जय…
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कई नर गाता।उर आनन्द समाता, पाप शमन हो जाता॥ ॐ जय…
आरती का समय
प्रतिदिन शाम, विशेषतः शुक्रवार और दीपावली पर

आरती विधि

माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के समय इस आरती का विशेष गायन होता है।

संदर्भ: जनसत्ता — jansatta.com

लाभ

धन-समृद्धि की प्राप्ति।
सुख-संपत्ति का वास।
पाप का शमन।