यह वृंदावन के श्री बांके बिहारी जी की प्रसिद्ध आरती है। इस पृष्ठ पर पूर्ण पाठ और महत्व दिया गया है।

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं का महत्व

यह आरती वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में गाई जाने वाली आरती है। इसमें श्री कृष्ण के मोर मुकुट, बंसी, गंगा चरण और हरीदास जी से जुड़े स्वरूप का वर्णन है।

आरती

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं, श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे, प्यारी बंसी मेरो मन मोहे ।देख छवि बलिहारी मैं जाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी, जिसने सारी दुनिया तारी ।मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
दास अनाथ के नाथ आप हो, दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो ।हरी चरणों में शीश झुकाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
श्री हरीदास के प्यारे तुम हो ।मेरे मोहन जीवन धन हो।देख युगल छवि बलि बलि जाऊं ।॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं, हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं, श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।
आरती का समय
प्रतिदिन संध्या की आरती में

आरती विधि

बांके बिहारी जी की मूर्ति के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें।

संदर्भ: भक्ति भारत — bhaktibharat.com

लाभ

कृष्ण कृपा की प्राप्ति।
मन में प्रेम और भक्ति का संचार।