सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती समर्थ रामदास स्वामी द्वारा रचित प्रसिद्ध गणेश आरती है, जो मूल रूप से मराठी में है। यहाँ मूल मराठी पाठ शब्दशः दिया गया है।
सुखकर्ता दुःखहर्ता — गणेश आरती का महत्व
सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती की रचना समर्थ रामदास स्वामी ने की है। यह मूल मराठी आरती सात पदों वाली है, जबकि सामान्यतः केवल तीन पद प्रचलित हैं। इस पृष्ठ पर पूर्ण मूल पाठ संरक्षित किया गया है।
आरती
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ॥
सर्वांगी सुंदर उटि शेंदुराची ।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ॥१॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥ध्रु०॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा ॥
हिरेजडीत मुकुुट शोभतो बरा ।
रुणझुणती नूपरें चरणीं घागरिया ॥ जय० ॥२॥
माथा मुकुट मणी कानी कुंडले ।
सोंड दोंदावरी शेंदुर चर्चिले ।।
नागबंद सोंड-दोंद मिराविले ।
विश्वरूप तया मोरयाचे देखिले ॥ जय० ॥३॥
चतुर्भुज गणराज बाही बाहुटे ।
खाजयाचे लाडू करुनी गोमटे ।।
सुवर्णाचे ताटी शर्करा घृत ।
अर्पी तो गणराज विघ्ने वारीतो ॥ जय० ॥४॥
छत्रे चामरे तुजला मिरविती ।
उंदीराचे वाहन तुजला गणपती ।।
ऐसा तु कलीयुगी सकळीक पाहसी ।
आनंदे भक्तासी प्रसन्न होसी ॥ जय० ॥५॥
ता ता धि मि किट धि मि किट नाचे गणपती ।
ईश्वर पार्वती कौतुक पाहती ।।
ताल मृदंग वीणा घोर उमटती ।
त्यांचे छंदे करुनी नाचे गणपती ॥ जय० ॥६॥
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना ।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना ॥
दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटीं पावावें निर्वाणीं रक्षावें सुरवर वंदना ॥ जय ० ॥ ७ ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥॥
आरती विधि
गणेश जी के समक्ष दीपक जलाकर मूल मराठी पाठ के अनुसार आरती करें। हिंदी भाषियों के लिए नीचे दिए गए पाठ को श्रद्धापूर्वक पढ़ा जा सकता है।
संदर्भ: मराठी सृष्टि — marathisrushti.com (समर्थ रामदास स्वामी रचित मूल पाठ)
लाभ
सुख-दुःख से रक्षा।
गणेश जी की विशेष कृपा।
मनोकामना पूर्ति।