शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को गणेश जी की लोकप्रिय आरती है, जो मूलतः मराठी गोसावी परंपरा की है। इस पृष्ठ पर हिंदी संस्करण का पूर्ण पाठ दिया गया है।

शेंदुर लाल चढ़ायो — गणेश आरती का महत्व

यह आरती गणेश जी के लाल सिंदूर, दोंदिल स्वरूप, अष्टसिद्धि की स्वामिनी और विघ्नविनाशक मंगल मूर्ति स्वरूप की स्तुति करती है। ध्रुवपद 'जय देव जय देव' हर चरण के बाद दोहराया जाता है।

आरती

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहर को। हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवर को। महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को॥
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता। धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता॥ जय देव जय देव॥
अष्टौ सिद्धि दासी संकट को बैरी। विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी। कोटी सूरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी। गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबहारी॥
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता। धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता॥ जय देव जय देव॥
भावभगत से कोई शरणागत आवे। संतति संपत्ति सबहि भरपूर पावे। ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे। गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे॥
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता। धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता॥ जय देव जय देव॥
आरती का समय
प्रतिदिन गणेश पूजन के समय

आरती विधि

गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर श्रद्धा से आरती करें। शुक्ल चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी के दिन विशेष रूप से की जाती है।

संदर्भ: पावित्र ग्रंथ — pavitragranth.com

लाभ

विघ्न निवारण।
विद्या और बुद्धि की प्राप्ति।
संतान-संपत्ति का आशीर्वाद।