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पूर्णागिरि शक्तिपीठ शक्तिपीठ

Purnagiri Shakti Peeth — नाभि से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

पूर्णागिरी शक्ति पीठ, उत्तराखंड में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ माँ पूर्णागिरी को समर्पित है, जो देवी के शरीर की नाभि पर गिरे भाग पर स्थापित है। यह पीठ उत्तराखंड के टनकपुर क्षेत्र में स्थित है और यहाँ की अधिष्ठात्री देवी माँ पूर्णागिरी हैं। भैरव काल हैं। पूर्णागिरी मंदिर कुमाऊं हिमालय की गोद में स्थित है और यहाँ का दृश्य अत्यंत मनोरम है। यहाँ माँ पूर्णागिरी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। पूर्णागिरी मंदिर हर वर्ष लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।

परिचय

पूर्णागिरी शक्ति पीठ, उत्तराखंड में स्थित एक अत्यंत पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ सती देवी के शरीर की नाभि पर गिरे भाग पर स्थापित है। यहाँ की अधिष्ठात्री देवी माँ पूर्णागिरी हैं। भैरव काल हैं। यह मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर के पास स्थित है। कुमाऊं हिमालय की गोद में बसा यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

पौराणिक कथा

शाक्त पीठ निर्णय टीका और मार्कंडेय पुराण के अनुसार, जब देवी सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने प्राणों का त्याग किया, तो भगवान शिव क्रोधित होकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के विभिन्न भागों को काटा। हिमालय के इस क्षेत्र में माँ सती की नाभि गिरी। पुराणों में वर्णित है कि जब सती की नाभि यहाँ गिरी, तो यहाँ एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई। पूर्ण अर्थात पूर्णता और गिरी अर्थात पर्वत से इस स्थान का नाम पूर्णागिरी पड़ा।

भौगोलिक स्थिति

पूर्णागिरी शक्ति पीठ उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है। टनकपुर कस्बे से लगभग 20 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है। निकटतम प्रमुख शहर हल्द्वानी और रुद्रपुर हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर है। हवाई मार्ग से निकटतम पंतनगर हवाई अड्डा है।

ऐतिहासिक महत्व

पूर्णागिरी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। कुमाऊं राज्य के शासकों ने इस मंदिर के निर्माण और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंद वंश के शासकों ने यहाँ अनेक निर्माण कार्य करवाए। ब्रिटिश काल में भी यह मंदिर अपनी पहचान बनाए रखने में सफल रहा।

धार्मिक परंपरा

पूर्णागिरी शक्ति पीठ की धार्मिक परंपरा कुमाऊं और गढ़वाल की पारंपरिक पूजा पद्धति से प्रभावित है। यहाँ माँ पूर्णागिरी की पूजा शाक्त परंपरा के अनुसार की जाती है। नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा होती है।

वार्षिक उत्सव

नवरात्रि प्रमुख उत्सव है, जो चैत्र और आश्विन में मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान यहाँ बड़ा मेला लगता है। शिवरात्रि, दीपावली और अन्य त्योहार भी धूमधाम से मनाए जाते हैं।

यात्रा मार्गदर्शन

निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है। रेल मार्ग से टनकपुर स्टेशन निकटतम है। सड़क मार्ग से हल्द्वानी, रुद्रपुर और टनकपुर से बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

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नाभि - Navel

— शाक्त परंपरा
Devi_name

पूर्णागिरी - Purnagiri

— शाक्त परंपरा
Bhairava_name

काल - Kaala

— शाक्त परंपरा
Location

चंपावत, उत्तराखंड

— शाक्त परंपरा
Tradition

शाक्त परंपरा - 51 शक्ति पीठ

— शाक्त परंपरा

मतभेद और टिप्पणी

पूर्णागिरी शक्ति पीठ की पहचान को लेकर कुछ विवाद रहे हैं। प्रमुख विवाद यह है कि कुछ स्रोतों में इसे नाभि का पीठ बताया गया है। दूसरा विवाद पूर्णागिरी और अन्य नामों की पहचान को लेकर है। तीसरा विवाद भैरव काल की पहचान को लेकर है।

संपादकीय टिप्पणी:

यह लेख विभिन्न पौराणिक ग्रंथों, शाक्त पीठ निर्णय टीका और स्थानीय परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे दर्शन और पूजा के संबंध में स्थानीय पुजारियों से परामर्श करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्णागिरी शक्ति पीठ उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है।

यहाँ की अधिष्ठात्री देवी माँ पूर्णागिरी हैं।

इस पीठ के भैरव काल हैं।

यह पीठ माँ सती की नाभि पर गिरे भाग पर स्थापित है।

नवरात्रि यहाँ का प्रमुख उत्सव है।

निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर और रेलवे स्टेशन टनकपुर है।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • उत्तराखंड के शक्ति पीठ — डॉ. एच.सी. उप्रेती , कुमाऊं विश्वविद्यालय
  • अर्धकोश — मुंशी रामनाथ सुकुल
  • शाक्त पीठ निर्णय टीका — कलिका पुराण की टीका
  • मार्कंडेय पुराण — ऋषि मार्कंडेय , आदि पराशर
  • भारतीय तीर्थ स्थल निर्देशिका — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
  • कुमाऊं महात्म्य — स्थानीय कुमाऊं परंपरा