जय श्री राम ॥ सत्यं वद । धर्मं चर ॥ हमें फॉलो करें:

मूकाम्बिका शक्तिपीठ

Mookambika — स्थानीय पुट से संबंधित प्रमुख शक्तिपीठ

Mookambika Temple
Sri Mookambika Temple, Kollur, Karnataka — Wikimedia Commons (CC BY-SA)

मूकाम्बिका शक्ति पीठ कर्नाटक के उडुपी जिले में कोल्लूर में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध शक्ति पीठ है। यहाँ सती का स्थानीय पुट गिरा था। आदि शंकराचार्य से इस मंदिर का विशेष संबंध है।

परिचय

मूकाम्बिका शक्ति पीठ कर्नाटक राज्य के उडुपी जिले में कोल्लूर नगर में स्थित एक अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र शक्ति पीठ है। यह पीठ भारत के पचासी शक्ति पीठों में अट्ठाईसवाँ स्थान रखता है। पिठानिर्णय ग्रंथ के अनुसार, यहाँ सती का स्थानीय पुट गिरा था। मूकाम्बिका देवी यहाँ माँ दुर्गा के रूप में विराजमान हैं और इन्हें सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती तीनों देवियों का संयुक्त स्वरूप माना जाता है।

पौराणिक कथा

पिठानिर्णय और शिवपुराण के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सती के शरीर के खण्ड किए, तब उनका स्थानीय पुट — अर्थात् स्थान विशेष का अंग — इस पवित्र भूमि पर गिरा। इस स्थान पर दिव्य ज्योति प्रकट हुई।

आदि शंकराचार्य की परंपरा के अनुसार, जब शंकराचार्य दक्षिण भारत की यात्रा पर थे, तब उन्होंने इस स्थान पर माँ मूकाम्बिका के दर्शन किए। उन्हें यहाँ सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती तीनों देवियों का एकीकृत स्वरूप दिखाई दिया। शंकराचार्य ने यहाँ श्री चक्र की स्थापना की और इस मंदिर को प्रमुख शक्ति पीठ के रूप में स्थापित किया। उन्होंने इसे शक्तिपीठों की श्रृंखला में एक विशेष स्थान दिया।

भौगोलिक स्थिति

मूकाम्बिका मंदिर कर्नाटक के उडुपी जिले में कोल्लूर में स्थित है। यह स्थान मैंगलोर से लगभग साठ किलोमीटर और उडुपी से लगभग चालीस किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर कुदश्री पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। केरल और कर्नाटक की सीमा पर स्थित यह मंदिर पश्चिमी घाट की हरियाली से घिरा हुआ है।

ऐतिहासिक महत्व

मूकाम्बिका मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। आदि शंकराचार्य के आगमन और श्री चक्र स्थापना के प्रसंग से इसका प्राचीन महत्व प्रमाणित होता है। मंदिर की वर्तमान संरचना विजयनगर काल की प्रतीत होती है। केलाडी नायकों और मैसूर के वोडेयार शासकों ने इस मंदिर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

धार्मिक परंपरा एवं पूजा विधि

मूकाम्बिका मंदिर में प्रतिदिन पाँच पूजाएँ होती हैं। सुबह की पूजा ब्रह्म मुहूर्त में प्रारंभ होती है। यहाँ की विशेषता यह है कि देवी मूकाम्बिका के साथ भगवान शिव का भी प्रतिक रूप में पूजन होता है। श्री चक्र अत्यंत पवित्र माना जाता है। दुर्गा सप्तशती, ललिता सहस्रनाम और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

वार्षिक उत्सव एवं मेले

नवरात्र सबसे प्रमुख उत्सव है। महाशिवरात्रि भी यहाँ बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का विशेष आयोजन होता है।

यात्रा मार्गदर्शन

निकटतम रेलवे स्टेशन उडुपी है, जो चालीस किलोमीटर दूर है। मैंगलोर से साठ किलोमीटर। निकटतम हवाई अड्डा मंगलुरु हवाई अड्डा है। यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च है।

निष्कर्ष

मूकाम्बिका शक्ति पीठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अत्यंत महत्वपूर्ण शक्ति पीठ है। सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती का एकीकृत स्वरूप इसे अद्वितीय बनाता है।

विभिन्न परंपराओं में मतभेद

Body_part

स्थानीय पुट

— Pithanirnaya
Devi

मूकाम्बिका

— Pithanirnaya
Bhairava

कोटि लिंगेश्वर

— Pithanirnaya
Location

कोल्लूर, उडुपी, कर्नाटक

— Pithanirnaya
Triple_goddess

सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती का एकीकृत स्वरूप

— Shankaracharya tradition
Pilgrimage_status

शंकराचार्य द्वारा स्थापित पीठ

— Pithanirnaya
Shri_chakra

शंकराचार्य द्वारा श्री चक्र स्थापना

— Shankaracharya tradition

मतभेद और टिप्पणी

मूकाम्बिका में स्थानीय पुट को लेकर कुछ मतभेद हैं। कुछ परंपराओं में इसे शरीर के अन्य अंग से जोड़ा जाता है। पिठानिर्णय में स्थानीय पुट का उल्लेख स्पष्ट है।

संपादकीय टिप्पणी:

यह सामग्री पिठानिर्णय ग्रंथ, शिवपुराण, आदि शंकराचार्य की परंपरा और कर्नाटक के ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर संकलित की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक के उडुपी जिले में कोल्लूर में, मैंगलोर से साठ किलोमीटर दूर।

पिठानिर्णय के अनुसार, सती का स्थानीय पुट इस स्थान पर गिरा था।

मूकाम्बिका देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती तीनों देवियों का एकीकृत स्वरूप हैं।

शंकराचार्य ने इस स्थान पर मूकाम्बिका देवी के दर्शन किए और श्री चक्र की स्थापना की।

श्री चक्र एक अत्यंत पवित्र यंत्र है जो मंदिर में स्थापित है। इसकी पूजा अत्यंत फलदायक मानी जाती है।

उडुपी रेलवे स्टेशन चालीस किलोमीटर दूर है। मंगलुरु हवाई अड्डा निकटतम है।

संबंधित शक्तिपीठ

स्रोत और संदर्भ

  • मूकाम्बिका: धार्मिक अध्ययन — डॉ. टी. एम. सत्यनारायण , कर्नाटक विश्वविद्यालय
  • पिठानिर्णय ग्रंथ — अत्रि ऋषि , शैव परंपरा
  • शिवपुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य
  • कर्नाटक के तीर्थ स्थान — एम. एन. सीतारमण , कर्नाटक साहित्य प्रकाशन
  • कर्नाटक पर्यटन विभाग — कर्नाटक सरकार , आधिकारिक पोर्टल [link]
  • देवी भागवत पुराण — वेद व्यास , वैदिक साहित्य
  • शंकर भगवत्पाद विजय — माधव विद्यारण्य , वैदिक साहित्य